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VOL. 12, ISSUE 1 (2026)
गिरीश पंकज के उपन्यास में सामाजिक यथार्थबोध का चित्रण
Authors
विनीता शर्मा, डॉ. राजेश दुबे, डॉ. सविता मिश्रा
Abstract
गिरीश पंकज के उपन्यास में सामाजिक यथार्थबोध का चित्रण उनकी लेखनी का प्रमुख तत्व है। उनके उपन्यासों में शहरी और ग्रामीण समाज की विभिन्न समस्याएँ जैसे बेरोजगारी, भ्रष्टाचार, साम्प्रदायिकता, स्त्री-पुरुष असमानता, जातिवाद और गरीबी का सटीक चित्रण मिलता है। पंकज की भाषा एवं गहरी मानवीय समझ से यह समस्याएँ प्रभावी रूप से उभर कर सामने आती हैं। उनके पात्र समाज के हाशिए पर पड़े वर्गों की पीड़ा और संघर्ष को सजीव रूप में दर्शाते हैं। उनका लेखन न केवल मनोरंजन करता है, बल्कि समाज में व्याप्त असमानताओं और अन्याय पर गंभीर चिंतन भी प्रस्तुत करता है। गिरीश पंकज का साहित्य समाज में बदलाव की आवश्यकता को समझाने तथा पाठकों को जागरूक करने की प्रेरणा देता है।
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Pages:65-68
How to cite this article:
विनीता शर्मा, डॉ. राजेश दुबे, डॉ. सविता मिश्रा "गिरीश पंकज के उपन्यास में सामाजिक यथार्थबोध का चित्रण". International Journal of Hindi Research, Vol 12, Issue 1, 2026, Pages 65-68
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