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International Journal of
Hindi Research
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VOL. 12, ISSUE 1 (2026)
समकालीन कविताओं में पर्यावरण समस्याएं : एक अध्ययन
Authors
आतिरा एम
Abstract

प्रकृति, जो जीवन के आदि से लेकर अंत तक हर महत्वपूर्ण घड़ी में हमारा साथ देती है, आज निर्मम दोहन का शिकार हो रही है। हिंदी साहित्य जगत इस वास्तविकता से अनभिज्ञ नहीं है। यही कारण है कि आज की बदलती सामाजिक परिस्थितियों में ‘पर्यावरण’ विमर्श का एक अहम मुद्दा बनकर उभरा है। आज रचनाकार प्रकृति को केंद्र में रखकर निरंतर साहित्य सृजन कर रहे हैं, जिसमें कविताएँ अपने लघु आकार के बावजूद अपनी बात सशक्त ढंग से कहने में सक्षम हैं।

समकालीन कविताओं में अब प्रकृति का पारंपरिक गुणगान नहीं, बल्कि उस पर हो रहे अत्याचार और धरती से उसके विलुप्त होने की आशंकाओं को प्रमुखता से व्यक्त किया जा रहा है। इस आलेख में हिंदी कविता के विभिन्न पड़ावों पर प्रकृति-चित्रण के साथ-साथ, समकालीन युग में उसके बदले हुए स्वरूप पर प्रकाश डालने का प्रयास किया गया है। सर्वेश्वर दयाल सक्सेना, जसिंता केरकेट्टा, कुंवर नारायण, पार्वती तिर्की और केदारनाथ सिंह जैसे चुनिंदा कवियों की रचनाओं के माध्यम से प्रकृति की वर्तमान यथार्थ स्थिति को प्रस्तुत करने की कोशिश की गई है।
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Pages:120-125
How to cite this article:
आतिरा एम "समकालीन कविताओं में पर्यावरण समस्याएं : एक अध्ययन ". International Journal of Hindi Research, Vol 12, Issue 1, 2026, Pages 120-125
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