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International Journal of
Hindi Research
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VOL. 12, ISSUE 1 (2026)
हिंदी सिनेमा में राम-चरित्र: ऐतिहासिक और समकालीन परिप्रेक्ष्य
Authors
विष्णुप्रिया भुक्ता, डॉ स्नेहलता दास
Abstract
यह शोधपत्र विभिन्न दशकों में हिंदी सिनेमा में श्रीराम के सिनेमाई रूपांकन का विश्लेषण करता है। अध्ययन यह समझने का प्रयास करता है कि राम के स्वरूप और उनके आदर्शों को समय के साथ बदलते सांस्कृतिक, राजनीतिक और नैतिक परिवेश के अनुरूप फिल्मों में किस प्रकार प्रस्तुत किया गया। भारतीय जन चेतना में श्रीराम धर्म, न्याय और आदर्श के प्रतीक माने जाते हैं। मूक सिनेमा काल से ही उन्हें आदर्श पुरुष के रूप में पर्दे पर दिखाया जाता रहा है। 1917 की ‘लंका दहन’ और 1943 की 'राम राज्य’ जैसी आरंभिक भक्तिपरक फिल्मों से लेकर आधुनिक एनिमेटेड संस्करणों तक, फिल्मकारों ने धार्मिक आस्था और कलात्मक स्वतंत्रता के बीच संतुलन साधने का प्रयास किया है। यह शोध चयनित फिल्मों की कथा संरचना, सौंदर्यबोध, दर्शक-धारणा और विचारधारात्मक परिवर्तनों का अध्ययन करता है। साथ ही यह लेख हिंदी सिनेमा में राम-चरित्र के विकास को दशकों के तुलनात्मक परिप्रेक्ष्य में समझने का प्रयास करता है, विशेषतः 21वीं सदी में हुए उसके पुनर्पाठ को केंद्र में रखते हुए।अंततः शोधपत्र यह निष्कर्ष प्रस्तुत करता है कि हिंदी सिनेमा में श्रीराम का चित्रण एक बहुस्तरीय और परिवर्तनशील प्रक्रिया है, जो भारतीय समाज की विविध धाराओं को प्रतिबिंबित करती है।
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Pages:106-108
How to cite this article:
विष्णुप्रिया भुक्ता, डॉ स्नेहलता दास "हिंदी सिनेमा में राम-चरित्र: ऐतिहासिक और समकालीन परिप्रेक्ष्य". International Journal of Hindi Research, Vol 12, Issue 1, 2026, Pages 106-108
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