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International Journal of
Hindi Research
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VOL. 12, ISSUE 1 (2026)
सेवाराम यात्री के उपन्यासों में नारी के विविध रूपों की सार्थकता
Authors
डॉ. मधुरानी
Abstract
प्रस्तुत शोध-पत्र में से. रा. यात्री के उपन्यासों में नारी के विविध रूपों का विश्लेषण किया गया है, विशेष रूप से ‘करूणा’ के चरित्र के माध्यम से। यात्री ने महानगरीय जीवन की सामाजिक विडम्बनाओं, नैतिक द्वंद्वों तथा मध्यवर्गीय स्त्री की परिस्थितिजन्य विवशताओं को संवेदनशील और यथार्थपरक दृष्टि से चित्रित किया है। करूणा का चरित्र इस तथ्य को उद्घाटित करता है कि सामाजिक, आर्थिक एवं भावनात्मक दबावों के कारण स्त्री को कभी-कभी ऐसे कार्यों में प्रवृत्त होना पड़ता है जिन्हें समाज अवांछनीय मानता है। यात्री नारी को केवल पीड़िता के रूप में नहीं, बल्कि आत्मचेतस, संघर्षशील और अपने अस्तित्व की खोज में संलग्न व्यक्तित्व के रूप में प्रस्तुत करते हैं। उनके उपन्यासों में मध्यवर्गीय नारी की मानसिकता, व्यवहारिकता तथा पारिवारिक संबंधों के बीच उसकी आत्मपहचान की तलाश का सूक्ष्म चित्रण मिलता है। आधुनिक नारी अपने मूल्यों के प्रति सजग रहते हुए स्वतंत्र जीवन जीने की आकांक्षा रखती है। इस प्रकार से. रा. यात्री के उपन्यास नारी के बहुआयामी स्वरूप को संतुलित, मर्यादित एवं सार्थक रूप में रेखांकित करते हैं तथा समकालीन समाज की अंतर्विरोधी संरचनाओं का उद्घाटन करते हैं।
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Pages:149-151
How to cite this article:
डॉ. मधुरानी "सेवाराम यात्री के उपन्यासों में नारी के विविध रूपों की सार्थकता". International Journal of Hindi Research, Vol 12, Issue 1, 2026, Pages 149-151
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