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VOL. 12, ISSUE 1 (2026)
स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याओं के समाधान में योग का बढ़ता प्रचलन
Authors
चन्द्र मोहन
Abstract
सर्व विधित है, कि व्यक्ति के सर्वांगीण विकास की कल्पना उसके शारीरिक, मानसिक, सामाजिक, संवेगात्मक, बौद्धिक एवं आध्यात्मिक विकास से की जाती है। विकास की यह प्रक्रिया वैयक्तिक भिन्नताओं के अनुरूप प्रत्येक व्यक्ति में भिन्न-भिन्न होती है लेकिन हर एक व्यक्ति में विकास के सभी आयाम पृथक रूप से नहीं बल्कि सामूहिक रूप से विकसित होते हैं। किसी भी प्रकार के शारीरिक अथवा मानसिक कार्य के कुशल सम्पादन हेतु इन विकास के पहलुओं में सामंजस्य होना आवश्यक होता है। सामंजस्य के अभाव में किसी भी प्रकार के कार्यों का कुशल सम्पादन मुश्किल हैै। विकास के इस सभी पहलुओं के मध्य सामंजस्य जितना बेहतर होगा, विकास उतना ही उत्तम समझा जा सकता है। विकास के इस सभी आयामों को जाड़ने की प्रक्रिया में योग की महत्वपूर्ण भूमिका होती हैै। मनोविज्ञान भी बालक के सर्वांगीण विकास के लिए इन आयामों के मध्य संतुलन को महत्वपूर्ण मानता है। मन एवं शरीर के संतुलित सामंजस्य के परिणामस्वरूप ही बच्चे बेहतर अधिगम एवं उच्च उपलब्धि अर्जित कर सकते हैं। इसलिए आज प्रत्येक अभिभावक अपने बच्चों के संतुलित एवं संयमित विकास के लिए योग अथवा यौगिक क्रियाओं को अधिक महत्व देते हैं। कोविड-19 वैश्विक महामारी के दौरान भी लोगों ने स्वस्थ रहने के लिए, एवं अपनी रोग- प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने के लिए योग की ओर रुख किया।
प्रस्तुत शोध पत्र का उद्देश्य स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याओं के समाधान में योग के बढ़ते प्रचलन का अध्ययन करना है।
शोधकर्ता द्वारा अलग-अलग प्रकार के संदर्भित साहित्य का अवलोकन किया गया। सम्बन्धित साहित्यों के परिणामों से यह निष्कर्ष निकाला गया कि जीवन के अनेक क्षेत्रों से स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याओं के बेहतर समाधान में योग अहम् भूमिका निभा रहा है जिस कारण वर्तमान समय में योग अधिक प्रचलन में है।
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Pages:152-154
How to cite this article:
चन्द्र मोहन "स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याओं के समाधान में योग का बढ़ता प्रचलन". International Journal of Hindi Research, Vol 12, Issue 1, 2026, Pages 152-154
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