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VOL. 12, ISSUE 1 (2026)
राष्ट्रीय सांस्कृतिक काव्य- धारा के कवि श्यामनारायण पाण्डेय: संक्षिप्त विवेचन
Authors
विक्रान्त ब्राह्मण
Abstract
हिन्दी की राष्ट्रीय-सांस्कृतिक काव्यधारा के कवि श्यामनारायण पाण्डेय ने अपने देश के प्रति प्रेम एवं निष्ठा का परिचय दिया है। श्यामनारायण पाण्डेय ने आधुनिककाल के प्रथम सोपन में भारतेन्दु द्वारा प्रवर्तित राष्ट्रीय-सांस्कृतिक काव्यधारा का निर्वाह किया है। श्यामनारायण पाण्डेय से पूर्व मैथिलीशरण गुप्त, गया प्रसाद शुक्ल ‘सनेही‘, बालकृष्ण शर्मा ‘नवीन‘, सुभद्राकुमारी चौहान आदि राष्ट्रीयवादी कविताओं का सजृन कर रहे थे, पाण्डेयजी ने भी इसी काव्यधारा का अनुुसरण किया पर उनका स्वर अन्य कवियों से भिन्न रहा। वह हिन्दी के ऐसे कवि थे जिन्होने बच्चों, युवाओं से लेकर बूढ़ों में एक समान वीर भावना का संचार किया। श्यामनारायण पाण्डेय का काव्य जनता को त्याग, बलिदान और कर्तव्यपरायणता का पाठ पढ़ाने के साथ-साथ देश, जाति, धर्म, संस्कृति के प्रति प्रेम व सम्मान का भाव पैदा करने का कार्य करता है। इनकी आरंभिक कविताओं में आध्यात्मिकता, देशभक्ति एवं जीवन के सुख- दुःख की भावपूर्ण अभिव्यक्तियाँ उपस्थित हैं तो बाद के साहित्य में प्रौढ़ता की स्पष्ट छाप दिखती है।
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Pages:160-162
How to cite this article:
विक्रान्त ब्राह्मण "राष्ट्रीय सांस्कृतिक काव्य- धारा के कवि श्यामनारायण पाण्डेय: संक्षिप्त विवेचन". International Journal of Hindi Research, Vol 12, Issue 1, 2026, Pages 160-162
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