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VOL. 12, ISSUE 1 (2026)
आदिवासी कलारूपों में नाटकीय तत्वों का अध्ययन
Authors
अंकुश सिंह, डॉ. सुरेंद्र बहादुर सिंह चौहान
Abstract
जनजातीय समाज में ऐसी हज़ारों मान्यताएं और कलारूप हैं जिनमे नाटकीय तत्वों की भरमार है । इन्हें हमे इनके बीच रहते हुए समझने की ज़रुरत है । कलारूप ही जिनका जीवन हो, ऐसे समाज या लोक से हम गहरी पैठ बनाकर ही, उनके जनजीवन से तत्वों को ग्रहण करते हुए अपने रंगकर्म में सार्थक, सफल और रचनात्मक प्रयोग कर सकते हैं । हमे अपनी रचनात्मकता के जरिये ही इन रंगतत्वों को अपने प्रयोगों में शामिल और उकेरने की कोशिश करनी चाहिए, वरना वो तत्व व्यापार की वस्तु बनकर रह जाते हैं । जनजातीय कलारूपों और रंगमंच में परस्पर आदान-प्रदान की अपार संभावनाएं मौजूद हैं । लेकिन हम केवल अपने मतलब की चीज़ निकालने के उद्देश्य से इनके पास जायेंगे तो हम उनके वास्तविक रूप से वंचित रह जायेंगे या यूँ कहें की हमे इनके आंतरिक सौन्दर्य का बोध आजीवन नही हो पायेगा । हमे लोक की सोंधी मिट्टी और जीवन शैली से बहुत कुछ सीखना होगा । एक हाथ से उनसे उनका जीवन रंग पाना होगा तो दूसरे हाथ से उनके विशुद्ध संस्कृति और कलारूपों में मंचीय प्रदर्शन प्रक्रिया को जोड़ना होगा । जब जनजातीय कलारूप और रंगमंच की रचनाभूमि एक होगी तब जाकर हम उनमे निहित तत्वों को पूरे सौन्दर्य के साथ अपने रचनाकर्म में प्रयोग कर सकेंगे, उन्हें अपना बनाने में कामयाब होंगे । सहज, सरल और जीवंत जनजातीय लोकमानस कभी ठहरता नही, जनजातीय जीवन शैली में एक नाट्य संसार रचा-बसा है । आवश्यकता है इन्हें सहेजने की, इन पर नज़र रखने की और इन्ही के अनुरूप उनके सुन्दर और कलात्मक रूपों को बचाने की ।
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Pages:165-167
How to cite this article:
अंकुश सिंह, डॉ. सुरेंद्र बहादुर सिंह चौहान "आदिवासी कलारूपों में नाटकीय तत्वों का अध्ययन". International Journal of Hindi Research, Vol 12, Issue 1, 2026, Pages 165-167
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