अरुपडै वीडू- भगवान मुरुगन के छह पवित्र धाम-तमिल धार्मिक इतिहास, पवित्र भूगोल और सांस्कृतिक पहचान में अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं। थिरुपरंकुंड्रम, तिरुचेंदूर, पलनी, स्वामिमलै , तिरुथनी और पलमुदिरचोलै स्थित ये मंदिर प्रारम्भिक संगम युग की प्राकृतिक उपासना परंपराओं से उत्पन्न होकर मिथकीय, साहित्यिक, स्थापत्य तथा सामाजिक–धार्मिक विकास की विविध परतों से समृद्ध हुए हैं। पर्वतों, वनों और प्राकृतिक झरनों से जुड़े प्राचीन तमिल पारिस्थितिक उपासना-स्थलों से विकसित होकर, ये धाम पाण्ड्य, पल्लव , चोल, विजयनगर और नायक जैसे राजवंशों के संरक्षण में विशाल मंदिर संस्थानों के रूप में परिवर्तित हुए। इनसे संबद्ध मिथक मुरुगन के विविध आयामों-योद्धा, गुरु, संन्यासी, शांति-दाता और करुणामय देवता-को रूपायित करते हैं, जबकि अभिलेखीय तथा साहित्यिक स्रोत उनके ऐतिहासिक विकास और सांस्कृतिक महत्व को रेखांकित करते हैं।
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