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International Journal of
Hindi Research
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VOL. 12, ISSUE 1 (2026)
मौनव्रत एवं गायत्री महामंत्र जप का युवा विद्यार्थियों के जीवन की गुणवत्ता स्तर पर पड़ने वाले प्रभाव का अध्ययन
Authors
डॉ. विद्या, डॉ. गिरीश सिंह अधिकारी, डॉ. नवीन चन्द्र भट्ट
Abstract
जीवन की गुणवत्ता को व्यक्तिपरक कल्याण के रूप में परिभाषित किया जा सकता है, किसी व्यक्ति की आशाओं और अपेक्षाओं और उनके अंतर को दर्शाता है”l प्रस्तुत शोध में अध्ययन की आवश्यकता, अध्ययन का महत्व, , जीवन की गुणवत्ता का परिचय एवं कमी के कारणों व लक्षणों का वर्णन किया गया है, तत्पश्चात विभिन्न यौगिक ग्रन्थों एवं विद्वानों के अनुसार योग की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि का संक्षिप्त परिचय दिया गया है। तत्पश्चात मौनव्रत एवं गायत्री महामंत्र जप की वैज्ञानिक पृष्ठभूमि का वर्णन किया गया है। तथा मौनव्रत एवं गायत्री महामंत्र से सम्बंधित पूर्व में हुए शोधों की समीक्षा की गई है। 
उत्तराखण्ड के सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय अल्मोड़ा जनपद विभिन्न विषयों के 120 छात्र- छात्राओं पर अध्ययन किया गया। जिनका चयन यादृच्छिक प्रतिचयन विधि द्वारा किया गया, प्रयोगात्मक समूह को मौनव्रत और गायत्री महामंत्र जप का तीन माह तक अभ्यास कराया गया तथा नियंत्रित समूह को यह अभ्यास नहीं दिया गया। दोनों समूहों का पूर्व व पश्चात परीक्षण कर प्राप्त आंकड़ो का मापन विधियों द्वारा टी परीक्षण कर विश्लेषण किया गया। प्रयोगात्मक समूह की छात्र - छात्राओं में गायत्री जप एवं मौन साधना के पश्चात की स्थिति में जीवन की गुणवत्ता स्तर का मध्यमान 26.85 हैl जबकि नियंत्रित समूह के छात्र - छात्राओं में पश्चात की स्थिति में जीवन की गुणवत्ता स्तर का मध्यमान 30.48 है l एवं टी.मूल्य 8.96 प्राप्त हुआ है जो कि 0.05 स्तर पर सार्थक हैl जो कि टी तालिका स्तर 2.00 से अधिक है l परिणाम स्वरूप शून्य परिकल्पना  “मौन व गायत्री महामंत्र जप का अभ्यास करने वाले छात्र और छात्राओं के जीवन की गुणवत्ता स्तर पर कोई सार्थक प्रभाव नहीं पड़ता हैl” निरस्त हो जाती है l अत: इससे यह निष्कर्ष निकलता है कि मौन व्रत व गायत्रीमंत्र जप से प्रयोगात्मक समूह के जीवन की गुणवत्ता स्तर में वृद्धि होती है l  विश्वविद्यालयी छात्र-छात्राओं के जीवन की गुणवत्ता स्तर पर गायत्रीमन्त्र जप एवं मौन साधना करने वाले समूह का टी.मूल्य 0.05 स्तर पर सार्थक है तथा न करने वाले छात्र-छात्राओं के समूह का टी.मूल्य 0,05 स्तर पर सार्थक नहीं हैं अत: शून्य परिकल्पना अस्वीकृत की गई, इस प्रकार गायत्रीमन्त्र जप एवं मौन साधना करने वाले समूह का टी.मूल्य के प्राप्तांक से स्पष्ट है कि गायत्री मंत्र जप एवं मौन साधना का छात्र-छात्राओं के जीवन की गुणवत्ता स्तर पर सार्थक प्रभाव पड़ा । 

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Pages:184-189
How to cite this article:
डॉ. विद्या, डॉ. गिरीश सिंह अधिकारी, डॉ. नवीन चन्द्र भट्ट "मौनव्रत एवं गायत्री महामंत्र जप का युवा विद्यार्थियों के जीवन की गुणवत्ता स्तर पर पड़ने वाले प्रभाव का अध्ययन". International Journal of Hindi Research, Vol 12, Issue 1, 2026, Pages 184-189
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