Logo
International Journal of
Hindi Research
ARCHIVES
VOL. 12, ISSUE 1 (2026)
लक्ष्मीनारायण रंगा का निबंध-संग्रह ‘योद्धा सन्यासी’ एवं वर्तमान परिप्रेक्ष्य
Authors
विजयलक्ष्मी व्यास, डॉ. अशोक धारनिया
Abstract
बहु आयामी साहित्य शिल्पी लक्ष्मीनारायण रंगा ने अनेक प्रभावपूर्ण निबंधों का सृजन किया है। उनके निबंधों में जहाँ एक ओर विषय की व्यापकता है वहीं दूसरी ओर प्रतिपाद्य विषय का सूक्ष्मता से विवेचन भी देखने को मिलता है। उनके द्वारा साहित्य, धर्म, इतिहास, शिक्षा, रंगमंच, लोक संस्कृति, लोक जीवन के साथ-साथ मानवीय संवेदनाओं को केन्द्र में रखकर जिन निबंध संग्रहो का सृजन किया है, उनकें से प्रमुख निबंध संग्रह हैं- ”योद्धा सन्यासी“, ”राजस्थान के अमर साधक“, ”शिक्षाः कुछ अनुभव“, ”ढाई आखर प्रेम के“, ”रंगमंच“ और ”रंग रंगीलो बीकानेर“ आदि। उनके निबंधो का प्रतिपाद्य विषय चाहे जो भी, उसके वर्तमान सम-सामयिक संदर्भ क व परिप्रेक्ष्य से पाठक के रूबरू जरूर कराते हैं। प्रस्तुत शोध-पत्र में उनके निबंध संग्रह ”योद्धा सन्यासी“ के निबंध-त्रयी ‘महासेतु’, ‘स्वामी विवेकानंद: नारी दलित विमर्श’, व ”स्वामी विवेकानंदः राजस्थान की देन“ का विवेचन किया गया है। इस निबंध संग्रह में कट्टरता, रूढ़िवादिता, संकीर्णता, अन्धविश्वास, छूआछूत, बाल विवाह, दहेज, लिंगभेद, नशाखोरी जैसी सामाजिक बुराईयों, दीन-हीन दलित, निरक्षर एवंगरीब जनता की समस्याओं के साथ-साथ त्याग, करूणा, समानता, स्वतन्त्रता, बन्धुत्व, प्रेम, दया आदि जैसे जीवन मूल्यों की निबंधकार ने संदर्भ सापेक्ष वर्णन किया है, जिनकी प्रासंगिकता आज भी ज्यों की त्यों बनी हुई है। यद्यपि निबंध्ा-साहित्य के विषय के वर्गीकरण की दृष्टि से यह निबंध-संग्रह ‘एतिहासिक निबंध’ या ‘ध्ाार्मिक निबंध’ की कोटि में रखा जाना चाहिए क्योंकि इसमें इतिहास पुरूष व सन्यासी स्वामी विवेकानंद के जीवन-प्रसंगों का उल्लेख है तथापि पूरे निबंध संग्रह के अध्ययन से यह प्रतीत होता है कि निबंधकार ने जैसे सारा वर्णन वर्तमान समस्याओं को केन्द्र में रखकर तथा वर्तमान परिप्रेक्ष्य में लिखा हो।

Download
Pages:210-214
How to cite this article:
विजयलक्ष्मी व्यास, डॉ. अशोक धारनिया "लक्ष्मीनारायण रंगा का निबंध-संग्रह ‘योद्धा सन्यासी’ एवं वर्तमान परिप्रेक्ष्य". International Journal of Hindi Research, Vol 12, Issue 1, 2026, Pages 210-214
Download Author Certificate

Please enter the email address corresponding to this article submission to download your certificate.