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VOL. 12, ISSUE 1 (2026)
वैश्वीकरण के दौर में बदलते जीवन मूल्यों का आलोचनात्मक विश्लेषण ( विशेष संदर्भ: रेहन पर रग्घू)
Authors
डॉ. सगीर अहमद
Abstract
‘रेहन पर रग्घू’ उपन्यास में सामान्य तौर पर उन सभी परिस्थितियों का चित्रण किया गया है जो कहीं न कहीं वैश्वीकरण की आंधी से प्रभावित हुआ है, चाहे वह बदलती संस्कृति या परंपरा और आधुनिकता का द्वंद्व हो, पारिवारिक रिश्ते का छीजपन अथवा उसे जबरन पकड़े रहने की कोशिश हो, गांव की बदलती राजनीति या गांवों में धीरेदृधीरे शहरीकरण का प्रभाव हो, जातियता का टूटता परिदृश्य हो, संबंधों में मूल्यविहीनता हो, मातृभूमि (जहां बच्चे पैदा हुए, खेले और बड़े हुए) के प्रति उदासीनता, पैसे के पीछे भागती जिंदगी, बदलती सामाजिक स्थिति, शिक्षा का निजीकरण, विदेशी संस्कृति से प्रभावित प्रेम विवाह का प्रचलन, लिवदृइनदृ रिलेशन का रिश्ता, पैसों की खातिर बिखरता परिवार, शॉर्टकट तरीके से पैसे कमाने वाली व्यक्तिगत जिंदगी, संबंधों में मूल्यविहीनता, बढ़ता यांत्रिकीकरण, छोटे कस्बाई शहरों में बदलती जिंदगियां और वृद्धावस्था का दंश, वृद्धावस्था के दौरान टूटते सारे भ्रम, एवं असमंजस की स्थिति को बड़े ही सीमित कलेवर के उपन्यास में प्रोफेसर रघुनाथ के माध्यम से काशीनाथ सिंह ने पकड़ा है, और साथ ही अपनी पैनी दृष्टि उपन्यास में बनाए रखी है।
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Pages:224-226
How to cite this article:
डॉ. सगीर अहमद "वैश्वीकरण के दौर में बदलते जीवन मूल्यों का आलोचनात्मक विश्लेषण ( विशेष संदर्भ: रेहन पर रग्घू)". International Journal of Hindi Research, Vol 12, Issue 1, 2026, Pages 224-226
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