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International Journal of
Hindi Research
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VOL. 12, ISSUE 1 (2026)
21वीं शताब्दी और ‘इन दिनों सतसई’
Authors
डॉ. ज्योति रानी
Abstract
सतसई  की परंपरा 'हाल' की 'गाथासप्तशती' से आरंभ हुई है। यह कृति प्राकृत भाषा में लिखी गई है। इसमें शृंगार रस की प्रधानता है साथ ही प्राकृतिक दृश्य तथा लोकजीवन का चित्रण करने वाली कथाएं हैं। ‘सतसई’ अर्थात सात सौ दोहों का संग्रह। यह मुक्तक काव्य की एक विशिष्ट विधा है। इसमें 700 या उससे अधिक छंद होते हैं। सतसई में प्रभाव सघनता और वचन वक्रता का सुंदर मिश्रण मिलता है। डॉ. अशोक कुमार द्वारा लिखित 'इन दिनों सतसई’ आधुनिक परिवेश को अभिव्यक्त करने वाली रचना है। वर्तमान में सामाजिक यथार्थ संक्रमणशील है जो क्षण-क्षण बदल रहा है। इसी बदलते यथार्थ को अशोक कुमार ने 'इन दिनों सतसई’ में अभिव्यक्त किया है। वर्तमान के अधिकांश महत्वपूर्ण मुद्दों को समेटते हुए प्रस्तुत संग्रह कवि की विषय विविधता का परिचय तो देता ही है, साथ ही प्रत्येक दोहा एक नया संदर्भ तथा ताजगी लिए हुए है। समकालीन दौर में दमित अस्मिताएं अपने अस्तित्व के लिए  संघर्षरत हैं। इस संघर्ष की दशा और दिशा क्या है, इसे कवि खुली नज़रों से देख रहा है। इन अस्मिताओं की समस्याएं, जिजिविषा, परिवेश तथा इनमें उभरती चेतना को भी कवि ने चित्रित किया है।
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Pages:215-216
How to cite this article:
डॉ. ज्योति रानी "21वीं शताब्दी और ‘इन दिनों सतसई’". International Journal of Hindi Research, Vol 12, Issue 1, 2026, Pages 215-216
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