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VOL. 12, ISSUE 1 (2026)
मेघदूतम् का समीक्षात्मक अध्ययन
Authors
डॉ. कुमुद कुमार पाण्डेय
Abstract
मेघदूत कालिदास की प्रौढ़ एवं परिकश्कृत कृति है इसमें कवि की प्रौढ़ कल्पना, उदात्तभावना, परिश्कृत शैली एवं कोमलकान्त पदावली का सामंजस्य दिखाई देता है यह कवि की कल्पना का मनोरम् प्रसून है अतएव विश्व के सभी सहृदयों ने इसकी मुक्तकण्ठ प्रषंसा की है यह गीतिकाव्य का उज्ज्वल माणिक्य है।1
संस्कृत साहित्य में कालिदास द्वारा लिखित मेघदूत ही स्वतन्त्र गीति काव्य की प्रथम सुव्यवस्थित रचना है। मेघदूत के अनन्तर यह परम्परा अबाध गति से प्रवाहित होकर अद्यावधि अक्षुण्ण धारा के रूप में चली आ रही है। मैकड़ोंनल ने मेघदूत को गीतिरत्न तथा हिरियात्रा ने महत्तम तथा सर्वश्रेश्ठ गीतिकाव्यों में से एक बताया है। कालिदास की इस कृति के सम्बन्ध में समीक्षकों की दृृष्टि है.....मेघे माघे गतंवयः। मेघदूत में इतना पठनीय है कि उसके अध्ययन में ही मनुश्य की आयु बीत सकती है। इसका कथानक इतना रोचक है और परिणाम स्वरूप न पाठक ऊबता है और न मेघ।
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Pages:269-272
How to cite this article:
डॉ. कुमुद कुमार पाण्डेय "मेघदूतम् का समीक्षात्मक अध्ययन". International Journal of Hindi Research, Vol 12, Issue 1, 2026, Pages 269-272
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