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International Journal of
Hindi Research
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VOL. 12, ISSUE 1 (2026)
डॉ.परशुराम शुक्ल की बाल कहानियोँ में नैतिक मूल्य
Authors
वसुंधरा देसाई
Abstract
हर समाज में उसके अपने कुछ मूल्य होते हैं जो नैतिक मूल्य या जीवन मूल्य कहलाते हैं।यह मूल्य समाज को सुचारू रूप से चलने में मार्गदर्शन करते हैं।मूल्यविहीन समाज उन्नति नहीं कर सकता।अगर समाज को प्रगति पथ पर आगे बढ़ाना है और स्थैर्य  बनाए रखना है तो नैतिक मूल्यों की आधारशिला होना आवश्यक है।समय के अनुसार मूल्य में परिवर्तन होता है, तथापि उनका उद्देश्य समान रहता है।सशक्त एवं सोद्देश्यपूर्ण  साहित्य इन मूल्यों का एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक संवहन करता  है| बिगड़ते हुए जीवन मूल्यों को सही मार्ग पर लाने का प्रयास एक उत्तम रचनाकार हमेशा करता है।डॉ. परशुराम शुक्ल की बाल कहानियों में भी हमें ऐसे ही प्राचीन एवं आधुनिक जीवन मूल्य दृष्टिगोचर होते हैं।बचपन में ही अगर कुछ नैतिक मूल्यों की शिक्षा बाल मन  पर हो जाए तो, उस समाज के उज्ज्वल भविष्य  निर्माण में अधिक कष्ट एवं समय की आवश्यकता नहीं लगती। किसी यथार्थ की अनुभूति हमें शुक्ला जी की कहानी पढ़ते हुए होती है।
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Pages:253-255
How to cite this article:
वसुंधरा देसाई "डॉ.परशुराम शुक्ल की बाल कहानियोँ में नैतिक मूल्य". International Journal of Hindi Research, Vol 12, Issue 1, 2026, Pages 253-255
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