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VOL. 12, ISSUE 2 (2026)
डॉ. खूबचंद बघेल का सामाजिक सुधार में योगदान
Authors
दुर्गेश कुमार, डॉ. जयपाल सिंह प्रजापति
Abstract
भारत जैसे बहुधार्मिक और बहुजातीय देश में सामाजिक एकता और सुधार की परंपरा प्राचीन काल से रही है। जब-जब समाज में असमानता, अंधविश्वास, अन्याय और भेदभाव बढ़ा, तब-तब समाज सुधारक व्यक्तित्वों ने जन्म लिया। छत्तीसगढ़ की पवित्र भूमि में जन्मे डॉ. खूबचंद बघेल ऐसे ही महान समाज सुधारक थे जिन्होंने अपने जीवन को जनजागरण, समानता और राष्ट्रीय चेतना के लिए समर्पित किया। सन 1900 में रायपुर जिले के पथरी गाँव में जन्मे डॉ. बघेल ने चिकित्सा शिक्षा प्राप्त करने के बाद भी डॉक्टर का पेशा छोड़कर समाज सेवा और स्वतंत्रता संग्राम का मार्ग चुना। उन्होंने सामाजिक कुरीतियों जैसे — जातिवाद, छुआछूत, असमानता और नारी उत्पीड़न के विरुद्ध डटकर संघर्ष किया। “पंक्ति तोड़ो आंदोलन” के माध्यम से उन्होंने जातिगत भेदभाव को चुनौती दी और “भारतवंशी जातीय सम्मेलन” आयोजित कर सामाजिक एकता का संदेश दिया।
महिलाओं को समाज में सम्मानजनक स्थान दिलाने के लिए उन्होंने “किसबिन नाच” जैसी प्रथाओं पर रोक लगवाई और महिला सशक्तिकरण के पक्ष में आंदोलन चलाया। सामाजिक विषमता के विरोध में उन्होंने अपने परिवार तक के विरोध को झेला, किन्तु अपने सिद्धांतों से कभी पीछे नहीं हटे। उन्होंने अपने समाज में अध्यक्षीय भाषणों के माध्यम से दहेज, शराबखोरी और आर्थिक असमानता जैसी बुराइयों को दूर करने की प्रेरणा दी।
डॉ. बघेल के कार्य केवल सामाजिक सुधार तक सीमित नहीं थे; उन्होंने शिक्षा, कृषि, राजनीति और सांस्कृतिक जागृति के क्षेत्र में भी अग्रणी भूमिका निभाई। उन्होंने छत्तीसगढ़ की अस्मिता और लोकसंस्कृति के संरक्षण को अपना कर्तव्य माना।
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Pages:24-25
How to cite this article:
दुर्गेश कुमार, डॉ. जयपाल सिंह प्रजापति "डॉ. खूबचंद बघेल का सामाजिक सुधार में योगदान". International Journal of Hindi Research, Vol 12, Issue 2, 2026, Pages 24-25
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