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VOL. 12, ISSUE 2 (2026)
नव संवत्सर, रामनवमी एवं हनुमान जयंती का समकालीन महत्वरू भारतीय परंपरा और आधुनिक संदर्भ में एक विश्लेषणात्मक अध्ययन
Authors
डॉ. ए. के. द्विवेदी
Abstract
यह शोध-पत्र श्रीलाल शुक्ल का उपन्यास ‘बिस्रामपुर का संत’ में ग्राम्य जीवन की विडम्बनाओं, सत्ता-संरचना की जटिलताओं और संतत्व की पारंपरिक अवधारणाओं पर गहन प्रहार करता है। इस कृति में स्पष्ट किया गया है कि जब संतत्व का आदर्श सत्ता-लिप्सा और स्वार्थपरक प्रवृत्तियों से प्रभावित हो जाता है, तब वह लोकमंगल का साधन न रहकर शोषण, पाखंड और अवसरवादिता का उपकरण बन जाता है। लेखक ने तीखे व्यंग्य के माध्यम से यह उद्घाटित किया है कि धर्म और राजनीति का गठजोड़ किस प्रकार समाज को नियंत्रित करने तथा जनता को भ्रमित करने का हथियार बन सकता है।
यह उपन्यास केवल एक साहित्यिक रचना भर नहीं, बल्कि सामाजिक यथार्थ का जीवंत चित्रण है, जो पाठक को धर्म-सत्ता की विडम्बनाओं और लोकतांत्रिक व्यवस्था की जटिलताओं पर पुनर्विचार करने को प्रेरित करता है। इस दृष्टि से ‘बिस्रामपुर का संत’ हिन्दी साहित्य में व्यंग्य-परंपरा की अनमोल धरोहर है, साथ ही यह सामाजिक-राजनीतिक विमर्श का भी एक सशक्त और विचारोत्तेजक दस्तावेज़ सिद्ध होता है।
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Pages:48-49
How to cite this article:
डॉ. ए. के. द्विवेदी "नव संवत्सर, रामनवमी एवं हनुमान जयंती का समकालीन महत्वरू भारतीय परंपरा और आधुनिक संदर्भ में एक विश्लेषणात्मक अध्ययन". International Journal of Hindi Research, Vol 12, Issue 2, 2026, Pages 48-49
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