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VOL. 12, ISSUE 2 (2026)
महीप सिंह के कथा साहित्य में वृद्ध समाज
Authors
श्रवण लाल सेन, डॉ. राम कृष्ण शर्मा
Abstract
यह शोध पत्र महीप सिंह के कथा साहित्य में निहित वृद्ध समाज को दर्शाता है। वृद्धों की समाजिक स्थिति, जीवन पद्धति, विचारधारा एवं संवेदनशीलता का विश्लेषण करता है। संवेदनशील कहानीकार महीपसिंह की कहानियों में पारिवारिक, सामाजिक वातावरण, सांस्कृतिक जीवन एवं राजनीतिक परिस्थितियों का चित्रण मिलता है। जिसकी प्रांसगिकता स्वयं सिद्ध है। वे मानवतावादी कहानीकार है उनकी कहानियों की प्रासंगिकता को हमे इस रूप में दिखाई देती है। उनकी रचनाएँ सामान्य जनजीवन की सभी परिस्थितियों की विषय वस्तु लिए हुए है। उन्होंने सामान्य जीवन के अनुभवों को साझा करते हुए रचनाएँ लिखी है। उनकी कहानियों को कालजयी इसीलिए कहा जाता है क्योंकि आजादी के बाद में लिखी गई उनकी कहानियाँ आज भी प्रांसगिक है। बढ़ते भौतिकवाद एवं उपभोक्तावाद में व्यक्ति का जीवन कितना परिवर्तित होता जा रहा है ऐसे में मानवीय एवं नैतिक मूल्यों को सुरक्षित रखना मुश्किल होता जा रहा है। इसका प्रभाव व्यक्ति के साथ-साथ परिवार, समाज, एवं देश पर भी पड़ रहा है।
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Pages:26-27
How to cite this article:
श्रवण लाल सेन, डॉ. राम कृष्ण शर्मा "महीप सिंह के कथा साहित्य में वृद्ध समाज". International Journal of Hindi Research, Vol 12, Issue 2, 2026, Pages 26-27
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