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VOL. 12, ISSUE 2 (2026)
“मन्नू भंडारी की कहानियों में मध्यवर्गीय नारी का संघर्ष”
Authors
कैलाश चन्द्र खटीक, डॉ. रामकृष्ण शर्मा
Abstract
लेखिका मन्नू भण्डारी ने अपनी कहानियों के माध्यम से मध्यवर्गीय स्त्री के जीवन-संघर्ष को प्रभावशाली ढंग से अभिव्यक्त किया है। उनकी रचनाओं में यह स्पष्ट दिखाई देता है कि मध्यवर्गीय महिला केवल पारंपरिक भूमिकाओं तक सीमित रहने वाली पात्र नहीं है, बल्कि बदलते सामाजिक परिवेश में वह अपनी पहचान स्थापित करने के लिए निरंतर प्रयासरत रहती है। उनकी कहानियाँ मध्यवर्गीय स्त्री के मानसिक द्वंद्व, सामाजिक दबाव, पारिवारिक दायित्व तथा भावनात्मक पीड़ा को यथार्थपरक रूप में प्रस्तुत करती हैं। लेखिका ने नारी के आत्मसम्मान, स्वतंत्र अस्तित्व और सामाजिक परिस्थितियों के बीच उत्पन्न संघर्ष को संवेदनशीलता के साथ चित्रित किया है। इसी कारण उनके कथा-साहित्य में मध्यवर्गीय महिला की पीड़ा, असुरक्षा, अकेलापन तथा आत्मसंघर्ष प्रमुख रूप से उभरकर सामने आते हैं।
साथ ही उनकी कहानियों में यह भी स्पष्ट रूप से उभरकर सामने आता है कि मध्यवर्गीय स्त्रियाँ एक ओर परंपराओं और सामाजिक बंधनों से घिरी हुई हैं, तो दूसरी ओर वे उन्हीं बंधनों के विरुद्ध अपनी स्वतंत्रता और अधिकारों के लिए आवाज उठाने का साहस भी रखती हैं। उनमें विकसित होती जागरूकता और आत्मचेतना इस बात का प्रमाण है कि वे अपनी अस्मिता और अस्तित्व के प्रति सजग हो चुकी हैं। इस प्रकार मन्नू भण्डारी की कहानियाँ मध्यवर्गीय महिला के संघर्ष, संवेदनाओं और बदलते सामाजिक मूल्यों को प्रभावशाली ढंग से अभिव्यक्त करते हुए हिन्दी कथा-साहित्य में नारी-विमर्श के महत्वपूर्ण आयामों को उजागर करती हैं।
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Pages:28-31
How to cite this article:
कैलाश चन्द्र खटीक, डॉ. रामकृष्ण शर्मा "“मन्नू भंडारी की कहानियों में मध्यवर्गीय नारी का संघर्ष”". International Journal of Hindi Research, Vol 12, Issue 2, 2026, Pages 28-31
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