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International Journal of
Hindi Research
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VOL. 12, ISSUE 2 (2026)
भारतीय ज्ञान परंपरा में महिलाओं का योगदान
Authors
डॉ. माया सगरे – लक्का
Abstract
भारतीय संस्कृति और ज्ञान परंपरा में महिलाओं का स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण और विशिष्ट रहा है | वैदिक युग से आधुनिक युग तक नारी केवल जीवन दासिनी नहीं रही है | शिक्षा, दर्शन, साहित्य, कला, धर्म इनमें भी उसका योगदान रहा है | ऋग्वेद और उपनिषद काल  में स्त्रियों को आध्यात्मिक और दार्शनिक विमर्श में समान अधिकार मिला |  जैसे-जैसे समय परिवर्तित हुआ, उन्हें सामाजिक, राजनीतिक, धार्मिक परिस्थितियों में हुए परिवर्तनों ने  उनकी भूमिका को ही प्रभावित किया |  स्म्रुति काल में स्त्रियों को शिक्षा और ज्ञानर्जन से दूर कर दिया गया था |  उन्हें परिवार तक ही सीमित रखा गया था |  लेकिन भक्ति काल में फिर से स्त्रियों ने अपनी भक्ति और ज्ञान को समाज के सामने लाने का प्रयास किया |  मीराबाई, अक्का महादेवी जैसी महिलायें ज्ञान और आध्यात्मिकता की संवाहक बनी |  तत्पश्चात आधुनिक युग में सामाजिक सुधार आंदोलन की शुरुआत हुई|  तब महिलाओं की शिक्षा और अधिकारों के लिए सावित्रिबाई फुले, पंडिता रमाबाई आदि महिलाएं कार्यरत हुई |  इस शोध पत्र में वैदिक काल से आधुनिक काल तक  भारतीय ज्ञान परंपरा में महिलाओं का योगदान रहा है इसे उदाहरणों के साथ विश्लेषण किया गया है |  इस आलेख में महिलाओं की भूमिका किस प्रकार विकसित हुई, किस प्रकार उस पर रोक लगाई गई और फिर अपने बलबूते पर उसने किस प्रकार अपनी पहचान बनाई यह  स्पष्ट किया गया है | 
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Pages:81-82
How to cite this article:
डॉ. माया सगरे – लक्का "भारतीय ज्ञान परंपरा में महिलाओं का योगदान". International Journal of Hindi Research, Vol 12, Issue 2, 2026, Pages 81-82
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