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VOL. 12, ISSUE 2 (2026)
संशय की एक रात : रामकथा का आधुनिक बोध
Authors
रीना
Abstract
आधुनिकता किसी पुरानी रीति अथवा परंपरा के बदले से आती है। आधुनिकता समसामयिक हो भी सकती है अथवा नहीं भी। कबीर के विचार मध्ययुगीन होते हुए भी आधुनिक है, आधुनिक काल सापेक्ष नहीं बल्कि परिवर्तन सापेक्ष है, नए मूल्य की प्रतिष्ठा है। हिंदी साहित्य में आधुनिकता की शुरुआत लगभग 20वीं शताब्दी से मानी जाती है जिसमें साहित्य प्राचीन मध्ययुगीन समाज को त्याग कर आधुनिक भाव बोध ग्रहण कर रहा था। देश पर अंग्रेजों का शासन था इसलिए पश्चिम में हुए औद्योगीकरण का प्रभाव भारत में भी देखा गया जिसके फलस्वरूप सामंतवादी व्यवस्था का अंत हो रहा था उसका स्थान पूंजीवादी व्यवस्था ने ले लिया था। इस परिवर्तन के साथ समाज में नए परिवर्तन हुए, साथ ही साहित्य में भी अनेक परिवर्तन हुए। भारतेंदु तथा महावीर प्रसाद द्विवेदी नवजागरण की अग्रदूत माने जाते हैं जहां साहित्य रीतिवादी परंपरा से ग्रसित था और सामाजिक विषयों पर साहित्य लेखन का अभाव था। नवजागरण आंदोलन के साथ साहित्य समाज से जुड़ा इसी बदलते स्वरूप में राम कथा का स्वरूप भी बदला। आधुनिक युग में रामकथा से संबंधित अनेक ग्रंथ लिखे गए। इसी राम कथा की एक कड़ी नरेश मेहता द्वारा रचित खंडकाव्य 'संशय की एक रात' भी है।
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Pages:79-80
How to cite this article:
रीना "संशय की एक रात : रामकथा का आधुनिक बोध ". International Journal of Hindi Research, Vol 12, Issue 2, 2026, Pages 79-80
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