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VOL. 12, ISSUE 2 (2026)
देश के राष्ट्र निर्माण में द्वारिका प्रसाद तिवारी ‘विप्र’ का अवदान
Authors
डॉ. मुमताज़ परवीन
Abstract
प्रत्येक रचनाकार अपनी लेखनी के माध्यम से समाज को आईना दिखाने के साथ-साथ एक नई दिशा भी प्रदान करता हैं, जिससे समाज का उद्धार हो सके और इस अभिव्यक्ति का माध्यम जनभाषा हो तो समझो सोने पर सुहागा । राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया केवल राजनीतिक स्वतंत्रता तक सीमित नहीं होती बल्कि इसमें सामाजिक, सांस्कृतिक, शैक्षिक तथा साहित्यिक योगदान भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। हिंदी साहित्य के अनेक रचनाकारों ने अपने लेखन के माध्यम से राष्ट्रीय चेतना को जागृत किया । द्वारिका प्रसाद तिवारी ‘विप्र’ ऐसे ही साहित्यकार थे, जिनकी रचनाओं में राष्ट्रप्रेम, सामाजिक जागरण, नैतिक मूल्यों और सांस्कृतिक चेतना का सशक्त स्वर दिखाई देता है। प्रस्तुत शोध-पत्र में उनके साहित्यिक योगदान तथा राष्ट्र निर्माण में उनकी भूमिका का विश्लेषणात्मक अध्ययन किया गया है।
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Pages:83-85
How to cite this article:
डॉ. मुमताज़ परवीन "देश के राष्ट्र निर्माण में द्वारिका प्रसाद तिवारी ‘विप्र’ का अवदान". International Journal of Hindi Research, Vol 12, Issue 2, 2026, Pages 83-85
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