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VOL. 12, ISSUE 2 (2026)
भारतीय भाषाविज्ञान: परंपरा और आधुनिक संदर्भ
Authors
डॉ. शिखा माहेश्वरी
Abstract
प्रत्येक समाज की भाषा उस समाज की एक सुदीर्घ परंपरा होती है | भाषा एक परंपरागत वस्तु है | भाषा नित परिवर्तनशील होते हुए भी स्थायित्व ग्रहण किए हुए है | भाषा अपने भाषाई समाज में नैसर्गिक एवं अविछिन्न रूप में प्रवाहित होती रहती है | भाषा एवं व्याकरण एक ही सिक्के के दो पहलू हैं| संवाद-विवाद भाषा द्वारा ही संभव हैं | प्रत्येक कालखंड में भाषा से संबंधित कुछ तथ्य पीछे छूट जाते हैं और भाषा नवीन तथ्य ग्रहण कर लेती है |
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Pages:89-91
How to cite this article:
डॉ. शिखा माहेश्वरी "भारतीय भाषाविज्ञान: परंपरा और आधुनिक संदर्भ". International Journal of Hindi Research, Vol 12, Issue 2, 2026, Pages 89-91
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