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VOL. 12, ISSUE 3 (2026)
कृष्णा सोबती का विशिष्ट यात्रा साहित्य : बुद्ध का कमंडल लद्दाख़
Authors
दीप्ति डिगल, डॉ. स्नेहलता दास
Abstract
प्रस्तुत शोध आलेख आधुनिक हिन्दी साहित्य की बहुआयामी लेखिका कृष्णा सोबती के एकमात्र परंतु महत्वपूर्ण यात्रा साहित्य “बुद्ध का कमंडल लद्दाख़” का सर्वांगीण विश्लेषण है। सोबती जी ने हिन्दी कथा साहित्य में स्त्री-विमर्श, विभाजन की त्रासदी, सामाजिक-सांस्कृतिक मूल्यबोध आदि प्रसंगों तथा अपने अनोखे भाषिक प्रयोगों से हिन्दी साहित्य जगत में अपना स्वतंत्र स्थान बनाया है। यात्रा साहित्य की विधा में भी अपनी कलम चला कर हिन्दी यात्रा साहित्य की परंपरा में एक नया प्रतिमान स्थापित किया है। मूलतः यात्रा साहित्य की विधा में पुरुष यात्राकारों का वर्चस्व महिला यात्राकारों की तुलना में अधिक रहा है। परंतु कृष्णा सोबती जैसी प्रतिभाशाली हस्ती के आविर्भाव से हिन्दी यात्रा साहित्य की बहुतायत समृद्धि हुई है। कृष्णा सोबती द्वारा सृजित “बुद्ध का कमंडल लद्दाख़” उनकी लद्दाख़ यात्रा के अनुभवों पर केंद्रित हैं, जो प्रत्येक दृष्टिकोण से यात्रा साहित्य की परंपरा में एक सफल नवीन प्रयोग है। प्रस्तुत शोध आलेख इस बात का प्रतिपादन करता है कि यह यात्रा साहित्य अपने यात्रा-वर्णन, भौगोलिक, प्राकृतिक, सांस्कृतिक, आध्यात्मिक आयामों के विस्तृत चित्रण तथा अद्वितीय शब्द-चित्र के समन्वय से हिन्दी यात्रा साहित्य के लिए एक विशेष उपहार है।
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Pages:1-3
How to cite this article:
दीप्ति डिगल, डॉ. स्नेहलता दास "कृष्णा सोबती का विशिष्ट यात्रा साहित्य : बुद्ध का कमंडल लद्दाख़". International Journal of Hindi Research, Vol 12, Issue 3, 2026, Pages 1-3
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