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VOL. 12, ISSUE 3 (2026)
छायावादी काव्य में प्रकृति और प्रेम का स्वरूप
Authors
राहुल, डॉ. कल्पना
Abstract
हिंदी साहित्य के छायावादी युग (1918–1936) में प्रकृति और प्रेम की अभिव्यक्ति एक नवीन संवेदनात्मक और आध्यात्मिक आयाम के साथ सामने आती है। इस युग के प्रमुख कवियों जयशंकर प्रसाद, सुमित्रानंदन पंत, महादेवी वर्मा तथा सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ ने प्रकृति को मानवीय चेतना का दर्पण तथा प्रेम को आत्मा की गहनतम अनुभूति के रूप में प्रस्तुत किया। प्रस्तुत शोध आलेख में यह विश्लेषण किया गया है कि छायावादी काव्य में प्रकृति और प्रेम केवल सौंदर्य के उपकरण नहीं हैं, बल्कि वे दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक और आध्यात्मिक विमर्श के वाहक भी हैं। लेख में प्रमुख कविताओं के उद्धरणों के आधार पर यह स्पष्ट किया गया है कि प्रकृति और प्रेम का अंतर्संबंध छायावादी काव्य की केन्द्रीय विशेषता है, जो इसे हिंदी साहित्य में विशिष्ट स्थान प्रदान करता है।
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Pages:24-27
How to cite this article:
राहुल, डॉ. कल्पना "छायावादी काव्य में प्रकृति और प्रेम का स्वरूप". International Journal of Hindi Research, Vol 12, Issue 3, 2026, Pages 24-27
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