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VOL. 12, ISSUE 3 (2026)
डिजिटल युग में लोक-साहित्य का संरक्षण और वैश्विक प्रसार
Authors
श्याम मिश्रा, सच्चिदानंद तिवारी
Abstract
प्रस्तुत शोध पत्र डिजिटल क्रांति के आलोक में लोक-साहित्य के बदलते स्वरूप, इसके संरक्षण की आधुनिक प्रविधियों और वैष्विक धरातल पर इसके प्रसार का विश्लेषण करना है। लोक-साहित्य, जो सदियों से पारंपरिक रूप से वाचिक परंपरा पर आधारित रहा है, वर्तमान में डिजिटल प्लेटफॉर्म्स (यूट्यूब, पॉडकास्ट, ब्लॉग, सोशल मीडिया इत्यादि) के माध्यम से श्अमरत्वश् प्राप्त कर रहा है। निम्न शोध पत्र में इस विषय को रेखांकित किया गया है कि डिजिटल संरक्षण केवल डेटा का संचयन नहीं, बल्कि श्ज्ञान के लोकतंत्रीकरणश् की एक वैज्ञानिक और सृजनात्मक प्रक्रिया है। इसके साथ ही यह शोध पत्र वैष्विक प्रसार के मार्ग में आने वाली श्सांस्कृतिक शून्यताश् और अनुवाद की चुनौतियों का भी विवेचन करता है। निष्कर्षतः यह शोध पत्र गहन अध्ययन के बाद यह सिद्ध करता है कि तकनीक , अनुवाद और मानवीय कौशल के समन्वय से लोक-साहित्य को एक श्सांस्कृतिक कवचश् के रूप में प्रतिष्ठित किया जा सकता है, जो न सिर्फ भाषाई अस्मिता को वैष्विक पहचान दिलाने का एक अनूठा प्रयास है बल्कि इससे लोक साहित्य का संरक्षण और वैष्विक प्रसार में अभूतपूर्व योगदान।
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Pages:36-39
How to cite this article:
श्याम मिश्रा, सच्चिदानंद तिवारी "डिजिटल युग में लोक-साहित्य का संरक्षण और वैश्विक प्रसार". International Journal of Hindi Research, Vol 12, Issue 3, 2026, Pages 36-39
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