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International Journal of
Hindi Research
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VOL. 12, ISSUE 3 (2026)
लल्ली और हब्बा की कश्मीरी कविताओं में प्रेम और आध्यात्मिकता
Authors
बीरेन्द्र किस्कु
Abstract
भक्तिकाल में कबीर, रैदास, तुलसीदास, मीरा जैसे कवि कविमित्री का अविर्भाव हुआ। इन्होंने अपनी भक्तिभावना, तप साहाना, तत्वज्ञान तथा उपदेशात्मक कविताओं से हिन्दी साहित्य को समृद्ध किया और समाज को संदेश दिया। मध्यकालीन समाज में स्त्रिायों की दशा काफी दयनीय थी। हालांकि स्त्री समाज की उत्थान के लिए कई प्रयास किये जा रहे थे, उनकी मुक्ति के लिए सशक्त स्व भी उभरा। इसी बीच मीरा जैसी कवयित्री का अविर्भाव हुआ, उनकी कविताओं में स्त्री मुक्ति का स्वर मुखरित हुआ है। जिस तरह ब्रजमंडल में कृष्ण भक्त कवियित्री मीराबाई प्रचलित थी उसी तरह कश्मीर में शैव भक्त योगिनी लल्लेश्वरी (ललद्यद) प्रचलित थी। उल्लेश्वरी के बाद कश्मीर में हब्बा खातून , अरणिमाल, जैसे कवियित्री का आविर्भाव हुआ। इन कश्मीरी कवियित्रियों ने अपने तप साधना ज्ञान तथा प्रेमपरक कविताओं से कश्मीरी साहित्यिक पंरपरा एवं अंततः भारतीय ज्ञान परंपरा को समृद्ध किया। यह शोध पत्र कश्मीरी साहित्यिक परंपरा और उसमें भक्त-सूफी कवि कवियित्रियों की योगदान का तुलनात्मक अध्ययन प्रस्तुत करने का प्रयास है।  

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Pages:82-84
How to cite this article:
बीरेन्द्र किस्कु "लल्ली और हब्बा की कश्मीरी कविताओं में प्रेम और आध्यात्मिकता". International Journal of Hindi Research, Vol 12, Issue 3, 2026, Pages 82-84

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