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VOL. 12, ISSUE 3 (2026)
कुंतला कुमारी साबत के हिन्दी काव्य में राष्ट्रीय चेतना और गांधीवादी दृष्टि
Authors
डॉ. रूपधर गोमांगो
Abstract
भारतीय स्वाधीनता आंदोलन के काल में साहित्य राष्ट्रीय जागरण का सशक्त माध्यम बनकर उभरा। इस युग के अनेक साहित्यकारों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से स्वतंत्रता, स्वदेशी, राष्ट्रीय एकता, सांस्कृतिक अस्मिता और सामाजिक पुनर्जागरण की चेतना का प्रसार किया। ओड़िया साहित्य की सुप्रसिद्ध कवयित्री, चिकित्सक और समाज-सुधारक कुंतला कुमारी साबत इसी राष्ट्रीय नवजागरण की प्रतिनिधि साहित्यकार हैं। यद्यपि उनकी ख्याति मुख्यतः ओड़िया साहित्य के कारण है, तथापि उनका हिन्दी काव्य भी राष्ट्रीय चेतना, गांधीवादी विचारधारा, राष्ट्रभाषा हिन्दी, भारतीय संस्कृति तथा नारी-जागरण के सशक्त स्वर का प्रतिनिधित्व करता है।
प्रस्तुत शोध-लेख में उनकी हिन्दी कविताओं का विश्लेषण उनके जीवन, साहित्यिक विकास और सामाजिक सक्रियता के आलोक में किया गया है। अध्ययन से स्पष्ट होता है कि उनकी हिन्दी कविताएँ केवल राष्ट्रभक्ति के भावात्मक गीत नहीं हैं, बल्कि भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन की वैचारिक एवं सांस्कृतिक अभिव्यक्ति भी हैं। इस शोध में यह प्रतिपादित किया गया है कि कुंतला कुमारी का हिन्दी काव्य भारतीय राष्ट्रीयता को भाषा, संस्कृति, स्त्री-चेतना और गांधीवादी जीवन-दर्शन से जोड़ते हुए एक व्यापक मानवीय दृष्टि प्रस्तुत करता है।
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Pages:70-73
How to cite this article:
डॉ. रूपधर गोमांगो
"कुंतला कुमारी साबत के हिन्दी काव्य में राष्ट्रीय चेतना और गांधीवादी दृष्टि". International Journal of Hindi Research, Vol 12, Issue 3, 2026, Pages 70-73
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