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VOL. 12, ISSUE 3 (2026)
हिंदी भाषा: कल, आज और परसों — उद्भव, संघर्ष-यात्रा और एआई युग में वैश्विक धरातल
Authors
ब्लेस्सनराजू
Abstract
हिंदी भाषा की विकास-यात्रा केवल शब्दों या बोलियों के बदलाव की कहानी नहीं है, बल्कि यह भारत की सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और सामाजिक चेतना की सजीव अभिव्यक्ति है। प्राचीन वैदिक संस्कृत से होकर पालि, प्राकृत और अपभ्रंश के विभिन्न पड़ावों को पार करती हुई हिंदी विविध लोक-बोलियों के अनूठे मेल से समृद्ध हुई है। स्वतंत्रता संग्राम के दौर में राष्ट्र की अस्मिता बनी इस भाषा को संविधान में संघ की राजभाषा का स्थान प्राप्त हुआ, यद्यपि औपनिवेशिक मानसिकता और राजनीतिक विरोधों के कारण इसे कई भाषाई संघर्ष झेलने पड़े। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गिरमिटिया मजदूरों और तीन करोड़ से अधिक प्रवासी भारतीयों ने हिंदी को वैश्विक पहचान दिलाई है। वर्तमान युग में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, 'भाषिणी' और 'भारतजेन' जैसे अत्याधुनिक डिजिटल मॉडलों के माध्यम से हिंदी प्राचीन सांस्कृतिक धरोहरों को सहेजने के साथ-साथ भविष्य की एआई दुनिया में एक अग्रणी भाषा के रूप में मजबूती से स्थापित हो रही है।
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Pages:74-76
How to cite this article:
ब्लेस्सनराजू "हिंदी भाषा: कल, आज और परसों — उद्भव, संघर्ष-यात्रा और एआई युग में वैश्विक धरातल". International Journal of Hindi Research, Vol 12, Issue 3, 2026, Pages 74-76
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