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VOL. 12, ISSUE 3 (2026)
बिहार के निचले न्यायालयों का एक क्षेत्रीय अध्ययन: जमीनी हकीकत, चुनौतियाँ और सुधार की दिशा
Authors
राजीव कुमार, डॉ. संजय तिवारी
Abstract
बिहार की अधीनस्थ न्यायपालिका को वर्तमान संकट, अत्यधिक लंबितता और बुनियादी ढांचागत कमियों से उबारकर आम जनमानस के लिए पारदर्शी, त्वरित और सुलभ बनाने हेतु एक सुदृढ़ और व्यापक नीतिगत रणनीति को लागू करना अत्यंत अनिवार्य है। बिहार के निचले एवं अधीनस्थ न्यायालय राज्य की संपूर्ण न्यायिक व्यवस्था की रीढ़ हैं, जो जिला एवं अनुमंडल (सब-डिवीजन) स्तर पर आम नागरिकों के लिए न्याय का पहला और सबसे महत्वपूर्ण द्वार बनते हैं। विभिन्न प्रशासनिक समीक्षाओं के अनुसार राज्य के लगभग 30ः से 35ः अनुमंडलीय न्यायालयों के पास न्यायाधीशों के बैठने के लिए पर्याप्त कमरों का अभाव है, जबकि दशकों पुराने मुकदमों के अभिलेख संकीर्ण और जर्जर रिकॉर्ड रूमों में धूल फांक रहे हैं। इसके साथ ही, दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों से आने वाले फरियादियोंकृविशेषकर महिलाओं और बुजुर्गोंकृके लिए 60ः से अधिक कोर्ट परिसरों में स्वच्छ पेयजल, छायादार शेड और कार्यशील शौचालयों जैसी मूलभूत सुविधाओं की घोर कमी बनी हुई है।
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Pages:96-98
How to cite this article:
राजीव कुमार, डॉ. संजय तिवारी "बिहार के निचले न्यायालयों का एक क्षेत्रीय अध्ययन: जमीनी हकीकत, चुनौतियाँ और सुधार की दिशा". International Journal of Hindi Research, Vol 12, Issue 3, 2026, Pages 96-98
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