International Journal of Hindi Research

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International Journal of Hindi Research
Vol. 2, Issue 4 (2016)

दाम्पत्य-जीवन के रिसते हुए रिश्तों का सन्तान पर दुष्प्रभाव (मोहन राकेश कृत ‘आधे-अधूरे’ के सन्दर्भ में)


डॉ. विनोद कुमार

आज आधुनिक परिवार में पति-पत्नी की सम्बन्धहीनता और संघर्ष का स्वरूप बहुतायत से देखने को मिल रहा है। स्त्री और पुरुष अतिपरिचय और अति-निकटता के सूत्र में बंधकर भी अजनबी और मेहमान के रूप में निर्वाह करने की नियति से अभिशप्त हैं। दोनो एक दूसरे के होने में नहीं न होने के बोध से टूटते हैं। उनके बीच अगर कहीं सम्बन्ध के खुष्क पर्दे की झलक है, तो सिर्फ लोगों की नजर में है, अन्दर से सभी सम्बन्ध नष्ट हो चुके हैं।
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डॉ. विनोद कुमार. दाम्पत्य-जीवन के रिसते हुए रिश्तों का सन्तान पर दुष्प्रभाव (मोहन राकेश कृत ‘आधे-अधूरे’ के सन्दर्भ में). International Journal of Hindi Research, Volume 2, Issue 4, 2016, Pages 24-28
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