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VOL. 3, ISSUE 1 (2017)
अनूप अशेष के नवगीतों में नया सौंदर्यशास्त्र
Authors
डाॅ0 बीरेन्द्र कुमार त्रिपाठी
Abstract
नवगीतों में नवीनता, आर्कषण, सौन्दर्यता के पैमाने पर देखा जाये तो अनूप- अशेष के नवगीातों में एक नया सौंदर्यशास्त्र दिखाई देता है इनके नवगीतों में आत्मीय संबधों के जाल पर तैरने वाले अजस्र विम्बों की सम्पदाएॅं भरी पडी है, नवगीत में प्रचलित गीतों से जब अपनी अभिव्यक्ति का षिल्प अलग किया तब उसके पास बिम्बों की समृद्वि ही सबसे अधिक थी, नवगीत समय के अनुसार स्वयं को बदल रहा था और षिल्प के कई-कई विधानों और उपकरणेां से जुड भी रहा था। अपनी अस्मिता के निषान गढते हुए समकालीन सन्दर्भो को समेट भी रहा था। इस प्रक्रिया में उसके सामथ्र्य के संकेत स्पष्ट् होने लगे थे। अनूप अशेष के गीत केवल अनूप-अशेष के गीत है उन पर किसी भी गीतकार की कोई परछाई नहीं है। सम्पूर्ण नवगीतों में एक अलग प्रकार की कलाकृति दिखाई देती है। जो पूरे रचनासंसार का सौन्दर्यशास्त्र है।
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Pages:69-71
How to cite this article:
डाॅ0 बीरेन्द्र कुमार त्रिपाठी "अनूप अशेष के नवगीतों में नया सौंदर्यशास्त्र". International Journal of Hindi Research, Vol 3, Issue 1, 2017, Pages 69-71
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