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VOL. 3, ISSUE 2 (2017)
वेदों में नारी की सार्वभौमिकता
Authors
सोनू
Abstract
मानव समाज में नारी को ‘मातृ’ रूप सर्वदा प्रतिष्ठित रहा है माता का सहज वात्सल्य, प्रेम, त्याग और साहस उत्सर्ग की उत्कट भावना पर आश्रित रहता है । इन मातृ रूपों मंे - नारी सुलभ, प्रेम, दया, ममता, धैर्य और साहस के अतिरिक्त संयम आदि गुण दृष्टव्य हैं। साथ ही विमाता और कुमाता के रूप में ईष्र्या, द्वेष, घृणा आदि दुष्ट प्रवृत्तियां भी प्रदर्शित की गयी है
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Pages:105-106
How to cite this article:
सोनू "वेदों में नारी की सार्वभौमिकता". International Journal of Hindi Research, Vol 3, Issue 2, 2017, Pages 105-106
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