ARCHIVES
VOL. 5, ISSUE 6 (2019)
श्रीमद्भगवद्गीता में निरूपित त्रिगुण एवं मानव व्यवहार
Authors
आशा रानी वर्मा
Abstract
श्रीमद्भगवद्गीता को सभी उपनिषदों का सार माना जाता है। गीता में मनुष्य के परस्पर भिन्न-भिन्न स्वभाव का कारण उसके अन्दर निहित त्रिगुण को बताया गया है। त्रिगुण से तात्पर्य है सतोगुण, रजोगुण, तमोगुण। सत्वगुण प्रकाशकारक और विकार रहित है, वह व्यक्ति को सुख और ज्ञान के अभिमान से बांधता है। रजोगुण, कामना और आसक्ति से उत्पन्न होता है, वह कर्मों और उनके फल से बांधता है। तमोगुण अज्ञान से उत्पन्न होता है, यह जीवात्मा को प्रमाद, अलास्य व निद्रा से बांधता है। प्रकृतिजन्य सभी पदार्थ त्रिगुणात्मक हैं। गीता में त्रिगुणातीत अवस्था का निरूपण कर ब्रह्मप्राप्ति का उपदेश दिया गया है।
Download
Pages:68-69
How to cite this article:
आशा रानी वर्मा "श्रीमद्भगवद्गीता में निरूपित त्रिगुण एवं मानव व्यवहार". International Journal of Hindi Research, Vol 5, Issue 6, 2019, Pages 68-69
Download Author Certificate
Please enter the email address corresponding to this article submission to download your certificate.

