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International Journal of
Hindi Research
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VOL. 6, ISSUE 3 (2020)
छायावादी काल और स्त्रीः चेतना
Authors
मीना कुमारी
Abstract
छायावादी काव्य द्विवेदी-युग की इतिवृत्तात्मक और संस्कारी कविता की प्रतिक्रिया स्वरूप जन्मी थी। इसीलिए छायावादी कवियों की चेतना का विकास व्यापक राष्ट्रीय और सांस्कृतिक चेतना के फलस्वरूप हुआ। राष्ट्रीय जीवन और साहित्य दोनों एक नवीन स्फूर्ति से अनुप्राणित हुए। छायावादी कवियों ने प्राचीन और नवीन दर्शनों से बहुत कुछ ग्रहण किया। इसीलिए उन कवियों ने आध्यात्मिक अभिव्यक्ति प्रस्तुत की। वास्तव में यह आध्यात्मिक अभिव्यक्ति रहस्यात्मक प्रवृत्ति की जनक थी और उनमें अभिव्यक्ति की आकुलता भी थी। ये आध्यात्मिक मूल्य आस्था-भाव पर आधारित थे। छायावादी विचारधारा में व्यक्तिवादी चेतना पल्लवित हुई, जो तत्कालीन युग-चेतना का ही एक रूप थी।
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Pages:60-62
How to cite this article:
मीना कुमारी "छायावादी काल और स्त्रीः चेतना". International Journal of Hindi Research, Vol 6, Issue 3, 2020, Pages 60-62
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