International Journal of Hindi Research

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International Journal of Hindi Research
International Journal of Hindi Research
Vol. 6, Issue 4 (2020)

मालवी लोक समाज में प्रचलित सामाजिक मान्यताए


रचना जैन

मालवी लोकसंस्कृति की धारा अनेक वर्षों से पीढ़ी-दर-पीढ़ी प्रवाहमान है किसी प्रदेष के सामान्य जन-जीवन से इसका संबंध होता है। इसके अन्तर्गत समाज में प्रचलित विभिन्न परम्पराएँ रीति-रिवाज, आचार-विचार, कर्मकाण्ड, संस्कार, लोक विष्वास तथा क्रियाकलाप आते हैं। घर-आँगन, गली-मोहल्ले, चबूतरें और चैपालों पर यहाँ की संस्कृति मालवा जनसामान्य के जीवन को आधार देती हैं। सुख-दुःख का अवसर हो या व्रत-पर्व और उत्सव का, जीवन के संस्कार हो या पूजा-अनुष्ठान सब तरफ आपको गीत-संगीत, कथा-वार्ता, चित्रावण-माण्डने जैसी कला रूपों में मालवी मन डूबा हुआ नजर आता है। यह ठेठ मालवीपन पुराने ग्रंथों से लेकर वर्तमान में प्रचलित लोक विष्वासों, परम्पराओं में निरन्तर छलकता हुआ दिखाई देता है। अतः लोक संस्कृति को क्षेत्र अत्यंत विस्तृत एवं व्यापक है। लोक संस्कृति में मानव जीवन के समस्त अंगों के साथ लोक साहित्य भी समाहित है।
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रचना जैन. मालवी लोक समाज में प्रचलित सामाजिक मान्यताए. International Journal of Hindi Research, Volume 6, Issue 4, 2020, Pages 60-62
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