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VOL. 6, ISSUE 5 (2020)
विद्यापति भक्त कवि थे अथवा श्रृंगारी
Authors
डॉ. सन्तोष कुमार पाण्डेय
Abstract
'विद्यापति भक्त कवि थे या श्रृंगारिक कवि? यह प्रश्न ही इस बात की ओर संकेत करता है कि विद्यापति के कृतित्व में कुछ ऐसा है जो उनको इस विवाद के घेरे में लाया। इस विवाद में एक और विवाद जुड़ा रहा कि विद्यापति रहस्यवादी कवि थे या नहीं। यह विवाद उन्नीसवीं शताब्दी के अन्तिम दशकों से लेकर बीसवीं सदी के प्रथम दो तीन दशकों – लगभग अर्ध शताब्दी तक चलता रहा। विद्यापति रहस्यवादी थे या नहीं, यह प्रश्न यहाँ विवेच्य नहीं है। वैसे रहस्यवादी होना भी कहीं न कहीं से भक्त होने से सम्बन्ध रखता है। यह विवाद हिंदी साहित्य में बार-बार उठता रहा है। इस विवाद पर विस्तार से रोशनी डालते हुए किसी निष्कर्ष पर पहुंचना इस लेख का लक्ष्य है।
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Pages:174-176
How to cite this article:
डॉ. सन्तोष कुमार पाण्डेय "विद्यापति भक्त कवि थे अथवा श्रृंगारी". International Journal of Hindi Research, Vol 6, Issue 5, 2020, Pages 174-176
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