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VOL. 6, ISSUE 6 (2020)
सौन्दर्यबोध के निकष पर नागार्जुन की कविता
Authors
रंजना कुमारी
Abstract
नागार्जुन की कविता और सौन्दर्य के मिनाज के स्तर पर सबसे अधिक निराला और कबीर के साथ जोड़कर देखा गया है। वैसे यदि व्यापक परिपेक्ष्य में देखा जाय तो नागार्जुन के काव्य में अब तक की पूरी भारतीय काव्य परंपरा ही जीवंत रूप में उपस्थित देखी जा सकती है। उनका कवि व्यक्तित्व कालीदास और विद्यापति जैसे कई कालजयी कवियों के रचना संसार के गहर अवगाहन, बौद्ध एवं माक्र्सवाद जैसे बहुजनोन्मुख दर्शन के व्यवजहारिक अनुगमन तथा सबसे बढ़कर अपने समय और परिवेश की समस्याओं, चिन्ताओं एवं संघर्षों से प्रत्यक्ष जुड़ाव तथा लोकसंस्कृति एवं लोकहृदय की गहरी पहचान से निर्मित हैं। उनका ‘यात्रीपन’ भारतीय मानस एवं विष्ज्ञय-वस्तु को समग्र और सच्चे रूप में समझने का सरल साधन व माध्यम उनकी रचित कविता रही है।
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Pages:35-37
How to cite this article:
रंजना कुमारी "सौन्दर्यबोध के निकष पर नागार्जुन की कविता". International Journal of Hindi Research, Vol 6, Issue 6, 2020, Pages 35-37
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