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International Journal of
Hindi Research
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VOL. 6, ISSUE 6 (2020)
उषाकिरण खान: कहानियों में वर्णित समाज
Authors
शम्भू पासवान
Abstract
उषाकिरण खान की कहानियों में वर्णित समाज को समझने के लिए पहले समाज की अवधारणा को जानना आवष्यक है। हम सभी जानते हैं कि समाज एक से अधिक लोगों के समुदाय से मिलकर बना एक वृहद समूह है, जिसमें सभी व्यक्ति मानवीय क्रियाकलाप करते हैं, जिसमें मानवीय आचरण, सामाजिक सुरक्षा और निर्वाह आदि की क्रियाएँ सम्मिलित होती है। समाज लोगों का ऐसा समूह होता है जो अपने अंदर के लोगों के मुकाबले अन्य समूहों से काफी कम मेलजोल रखता है। मनुष्य एक सामाजिक सामाजिक प्राणी है। अरस्तू ने कहा। समाज के बिना मनुष्य के जीवन का कोई महत्व नहीं है। व्यक्ति जो कुछ भी बनना चाहता है, वह समाज के वातावरण में ही बन सकता है।
समाज एक प्राकृतिक संस्था है, जिस पर व्यक्ति का अस्तित्त्व और विकास निर्भर करता है। यदि यह कहा जाय कि समाज मानव-जाति की सुरक्षा और विकास का मूल आधार है, तो यह कोई अतिष्योक्ति नहीं होगा। यह मानव जाति की सर्वश्रेष्ठ संस्था है। संस्था की परिभाषाओं और विषेषताओं का संक्षिप्त विवरण दिया जा सकता है। आम तौर पर सामाजिक शब्द का उपयोग ठीक से नहीं किया जाता है। कई बार हम किसी समुदाय या संघ के लिए समाज शब्द का उपयोग करने में संकोच नहीं करते हैं।
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Pages:38-39
How to cite this article:
शम्भू पासवान "उषाकिरण खान: कहानियों में वर्णित समाज". International Journal of Hindi Research, Vol 6, Issue 6, 2020, Pages 38-39
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