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VOL. 7, ISSUE 2 (2021)
21वीं सदी के रामकथा पर आधारित हिंदी उपन्यासों का समकालीन सन्दर्भ
Authors
सतीश चन्द्र सि
Abstract
२१वीं सदी का समय सूचना क्रांति, वैज्ञानिकता एवं तार्किकता का समय है। साहित्य के क्षेत्र में यह वैचारिकता और विमर्शों का समय रहा है जिसके परिणाम स्वरुप आदिवासी विमर्श, दलित विमर्श, स्त्री विमर्श, किन्नर विमर्श, पर्यावरण विमर्श, किसान विमर्श, विकलांग विमर्श आदि नये-नये विमर्शों का आगमन हुआ है। इन सभी विमर्शों के दौर में भी पौराणिक कथाएँ अपना एक अलग महत्त्व रखता हैं जो हमारी सांस्कृतिक धरोहर के रूप में विद्यमान है। पौराणिक कथाएँ साहित्य को हमेशा प्रभावित करती आयी है। भारतीय साहित्य पौराणिक कथाओं से मुक्त नहीं रहा, हिंदी साहित्य भी इसका अपवाद नहीं रहा है। भारतीय साहित्य में हिंदी साहित्य की जितनी विशालता और प्रधानता है उसी मात्रा में पौराणिक कथाओं का महत्व भी हिंदी साहित्य में है। रामकथा भारतीय साहित्य का एक महत्वपूर्ण अध्याय है जो समाज को हमेशा दिशा निर्देश करता आया है। रामकथा केवल एक पौराणिक कथा ही नहीं बल्कि सामाजिक, सांस्कृतिक, राजनैतिक, पारिवारिक, धार्मिक, साहित्यिक आदि मूल्यों की महागाथा है। वही साहित्य जीवित रहता है जो समय के समय के अनुसार अपनी प्रासंगिकता बनाये रखता है। इस दृष्टिकोण से रामकथा आज भी उतनी ही प्रासंगिक है जितनी कि पहले थी| इसलिए साहित्यकारों ने रामकथा के विभिन्न प्रसंग एवं पात्रों के माध्यम से समकालीन समस्याओं को उजागर करने में सफल रहे है।
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Pages:42-48
How to cite this article:
सतीश चन्द्र सि "21वीं सदी के रामकथा पर आधारित हिंदी उपन्यासों का समकालीन सन्दर्भ ". International Journal of Hindi Research, Vol 7, Issue 2, 2021, Pages 42-48
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