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VOL. 7, ISSUE 2 (2021)
नासिरा जी की नारी संबन्धी मान्यता एवं उपन्यासों में चित्रित कामकाजी नारी
Authors
Dr. Lija Achamma George
Abstract
पुरुष समाज की नारी मुक्ति विरोधी अन्यायी सोच को दफनाने की क्षमता शिक्षा से ही प्राप्त हो सकती है। नारी की क्षमता को अवरुद्ध करने में सब से बड़ा प्रतिबन्ध है शिक्षा का। परम्परा से समाज ने यह स्वीकार किया था कि नारियों को पढ़ने की कोई ज़रूरत नहीं है, उन्हें कोई नौकरी - चाकरी तो करनी नहीं चाहिए, उस के लिए घर-गृहस्थी का काम सीख लेना ही पर्याप्त है। किन्तु आज माँ-बाप अपनी बेटियों को शिक्षित करने और नौकरी दिलवाने में आगे-आगे हैं। आज उनकी मान्यता है कि सुशिक्षित नारी कामकाजी बनेगी। पति-पत्नी दोनों एकसाथ कमाने से ही परिवार के अन्दर या पारिवारिक जीवन में रोशनी छा जाएगी। नारी अधिक सीमा तक स्वतन्त्र, कामयाबी, आत्मनिर्भर बनकर अपने आपको, परिवार को, समाज को, देश को उन्नति प्रदान कर सके। यही नासिरा जी की मान्यता और गवाह है।
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Pages:71-74
How to cite this article:
Dr. Lija Achamma George "नासिरा जी की नारी संबन्धी मान्यता एवं उपन्यासों में चित्रित कामकाजी नारी ". International Journal of Hindi Research, Vol 7, Issue 2, 2021, Pages 71-74
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