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VOL. 7, ISSUE 2 (2021)
अब्दुल बिस्मिल्लाह के ‘जहरबाद’ में व्यवस्था और पुरुष सत्ता का शोषण
Authors
डॉ. मिनी जोर्ज
Abstract
‘जहरवाद’ अब्दुल जी का आत्म कथात्मक उपन्यास है। इस उपव्यास में ऐसे चरित्रों का निरुपण हुआ है जो गरीबी की रेखा के बहुत नीचे पाये जाते हैं। इनको राष्ट्रीय आय की वृद्धि का विश्वास नहीं होता।”2 इस उपन्यास में कथा वाचक ‘मैं’ ही मुख्य पात्र है। ‘मैं’ और उनके माँ – बाप की ज़िन्दगी की त्रासदी ही उपन्यास का मुख्यविषय है। अब्बा और अम्मा इस अभावमय जीवन से मुक्त होने को सोचते भी हैं किन्तु के समझ नहीं पा रहे थे कि उन कठिनाईयों से मुक्त होने का कौन सा उपाय वे करें। जहरबाद उपन्यास के जरिए अब्दुल बिस्मिल्लाह जी यही आग्रह करते हैं कि सर्वहारा वर्ग शोषण के प्रति सजग रहे, शोषण के विरुद्ध संघर्ष करें, अपने अधिकार और अस्तित्व को प्राप्त करें और समानता – स्वतन्त्रता व बन्धुत्व भरे समाज का नव निर्माण करें। यही उनकी प्रगतिवादी या मानवतावादी दृष्टिकोण है, जो समकालीन सन्दर्भ में सराहनीय है।
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Pages:97-101
How to cite this article:
डॉ. मिनी जोर्ज "अब्दुल बिस्मिल्लाह के ‘जहरबाद’ में व्यवस्था और पुरुष सत्ता का शोषण ". International Journal of Hindi Research, Vol 7, Issue 2, 2021, Pages 97-101
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