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International Journal of
Hindi Research
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VOL. 7, ISSUE 3 (2021)
शुष्क धान की सीधी बुवाई: संभावना, अनुक्रिया और समस्या
Authors
आरती भाटिया, बिदिशा चक्रवर्ती, रमेश चन्द हरित, निवेता जैन, संदीप कुमार
Abstract
भारत एक कृषि प्रधान देश है। धान (ओराइज़ा सटीवा) विश्व की सबसे महत्वपूर्ण खाधान्न फसलों में से एक चावल, दुनिया की आधी से अधिक आबादी का मुख्य भोजन है। धान की खेती के लिए पानी की आवश्यकता अधिक होती है। इसके लिए भारतीय किसान मानसून पर निर्भर रहता है। आज पानी का स्तर बहुत नीचे चला गया है। इससे सभी जगह पानी की किल्लत बनी रहती है। धान की सीधी बुवाई उचित नमी पर यथा संभव खेत की कम जुताई करके अथवा बिना जोते हुए खेतों में आवश्यकतानुसार गैर चयनात्मक खरपतवारनाशी का प्रयोग कर जीरो टिल मशीन से की जाती है। इस तकनीक से रोपाई एवं श्रम की जुताई की लागत में बचत होती है एवं फसल समय से तैयार हो जाती है जिससे अगली फसल की बुवाई उचित समय से करके पूरे फसल प्रणाली की उत्पादकता बढ़ाने में मदद मिलती है।
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Pages:62-66
How to cite this article:
आरती भाटिया, बिदिशा चक्रवर्ती, रमेश चन्द हरित, निवेता जैन, संदीप कुमार "शुष्क धान की सीधी बुवाई: संभावना, अनुक्रिया और समस्या ". International Journal of Hindi Research, Vol 7, Issue 3, 2021, Pages 62-66
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