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VOL. 7, ISSUE 3 (2021)
गोदान में गरीबी की समस्या: एक मूल्यांकन
Authors
पूनम रानी
Abstract
साहित्यकार मुंशी प्रेमचंद के सभी उपन्यास, कहानी व नाटक अपने कथानक मे एंकाकी नही हैं। सामाजिक कहे जाने वाले लगभग कोई भी समस्या उनकी कलम से बच नहीं पायी बाल-विवाह, गरीबी तथा शोषण, आर्थिक समस्या, पूंजीवाद, सामंतवाद, सामाजिक कुरीतियां इत्यादि उपविषयों पर उन्होंने जो कुछ भी लिखा वह समय एंव काल में बंधा नहीं और यही उनकी लेखन शैली की सबसे बड़ी व मुख्य विशषेता है। मुंशी प्रेमचंद की कलम ने जिस भी सामाजिक समस्या पर अपनी स्याही को खर्च किया वह अपने लिखने के समय से लेकर आज तक साहित्यकारों का मार्गदर्शन करने में सक्षम है। मेरे इस शोधपत्र के शीर्षक ’’गोदान में गरीबी की समस्या: एक मूल्यांकन’’ के अनुसार ’गोदान’ में व्याप्त ’गरीबी’ व उसके प्रभाव को ही प्रमुखताः से ध्यान में रखकर लेखन कार्य किया गया है, ताकि उक्त शीर्षक के अनुसार फैलाव से ज्यादा गहनता प्राप्त की जा सके।
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Pages:29-32
How to cite this article:
पूनम रानी "गोदान में गरीबी की समस्या: एक मूल्यांकन ". International Journal of Hindi Research, Vol 7, Issue 3, 2021, Pages 29-32
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