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VOL. 7, ISSUE 3 (2021)
प्रसाद की आलोचना-दृष्टि: कला, रहस्य और यथार्थ
Authors
डॉ. रोहित कुमार
Abstract
साहित्यालोचन के क्षेत्र में न केवल आलोचकों, दार्शनिकों ने कार्य किया है अपितु कई साहित्यकारों ने भी महत्वपूर्ण विचार देकर आलोचना के क्षेत्र को समृद्ध किया है | आधुनिक काल में स्वर्ण-युग कहे जाने वाले छायावाद के नामकरण में ही एक व्यंग्य छुपा हुआ है| शायद यही कारण है कि समर्थक आलोचकों के साथ-साथ प्रमुख साहित्यकारों ने भी अपना पक्ष प्रस्तुत किया है| यहाँ प्रसाद के कलात्मक सौन्दर्य-बोध, रहस्यवाद और यथार्थवाद से छायावाद को जन्म देने संबंधी विचारों को सरल भाषा में समझने का प्रयास किया गया है|
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Pages:56-61
How to cite this article:
डॉ. रोहित कुमार "प्रसाद की आलोचना-दृष्टि: कला, रहस्य और यथार्थ ". International Journal of Hindi Research, Vol 7, Issue 3, 2021, Pages 56-61
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