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International Journal of
Hindi Research
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VOL. 7, ISSUE 3 (2021)
हिंदी कविता एवं रामधारी सिंह “दिनकर”
Authors
Dr. Ratna Banerjee
Abstract
दिनकर के काव्य के उतार-चढ़ाव के प्रत्येक चरण को उनके जीवन के विकास क्रम के साथ जोड़ा जा सकता हैl दिनकर की कविता का विकास आदि से अंत तक द्वंदो से जूझने की कथा है -द्वंद जो प्रबुद्ध कवि को चिंतन और भावना के क्षेत्रों में प्रत्येक स्वर पर घेरते हैं, विकास करते हैं एवं उसे प्रगति के पथ पर ले जाते हैंl दिनकर जी ने उत्तम प्रतीकों का चयन करके अपूर्वचयी बुद्धि का परिचय दिया हैl छायावाद के वायवीय गगन से उन्होंने धरती पर ना केवल स्वयं आने का वल्कि कविता कामिनी को भी खींच लाने का जो प्रण किया था, उसकी पूर्ति उर्वशी की रचना से हुई हैl परंपरागत और प्रतीकों का उपभोग, उन्होंने एक नई दिशा में किया है lपरंपरा एवं प्रकृति का यह गठबंधन हिंदी काव्य के लिए निश्चय ही शुभ हैंl
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Pages:101-106
How to cite this article:
Dr. Ratna Banerjee "हिंदी कविता एवं रामधारी सिंह “दिनकर” ". International Journal of Hindi Research, Vol 7, Issue 3, 2021, Pages 101-106
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