ARCHIVES
VOL. 7, ISSUE 3 (2021)
भारतीय दर्शन के सिद्धांत
Authors
हर्षवर्धन गोस्वामी
Abstract
यद्यपि वैदिक दर्शनों में एकता और उनके समन्वय का सिद्धांत प्रांरभ से ही स्थापित किया है। तार्किक भारतीय दर्शनों में पारस्पारिक अंतद्वद अवश्य देखने को मिलता है किन्तु लक्ष्य सभी दर्शनों का एक ही हैं वैदिक दर्शन समन्वय प्रधान है। विभिन्न अवधारणाओं, भिन्न-भिन्न विचारधाराओं धर्मों एवं जीवन के समस्त व्यवहारो का एकमात्र लक्ष्य ब्रह्मन ही है। ‘‘ब्रहनवल्लक्ष्यमुच्सते।‘‘ सांख्य, न्याय, मीमांसा आदि षट्दर्शनों की प्रवृत्ति इसी ब्रह्म की ओर रहती है। इसी ब्रह्म की भावना में ही अनेकत्व में एकत्व के दर्शन किये जाते है। यही भारतीय दर्शन का उद्देश्य है। क्योंकि भारतीय दर्शन विभिन्न दर्शन की विचारधाराओं का समष्टि संग्रह है। भारतीय दर्शन अपनी विवेचनात्मकता के लिए प्रचलित है। भारतीय दर्शन में व्यवहारिक के लिए प्रमाणों के महत्व को स्पष्टतः स्वीकार किया। भारतीय दर्शन का मुख्य उद्देश्य जीवन की शास्वत व्याख्या करना है। मानव मस्तिष्क अनवरत् विंिभन्न रूप से विचारशील रहता है। अनवरत चिंतन की कला का नाम दर्शन है। तो यह तो निश्चित है कि दर्शन का अभ्युदय कुछ संदिग्ध प्रश्नों के समानार्थ ही हुआ है। समस्त भूमंडल के मनिषियों की दृष्टि में जगत् यदि दुःख मात्र पूर्ण नहीं है, कम से कम दुःखमय तो अवश्य ही है। भारतीय दर्शनिक पंरपरा में इस संसार की दुःख, ममता और भी स्पष्ट है।
Download
Pages:149-153
How to cite this article:
हर्षवर्धन गोस्वामी "भारतीय दर्शन के सिद्धांत". International Journal of Hindi Research, Vol 7, Issue 3, 2021, Pages 149-153
Download Author Certificate
Please enter the email address corresponding to this article submission to download your certificate.

