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VOL. 7, ISSUE 4 (2021)
“सूरजमुखी अंधेरे के” की नायिका रत्ती और आज के समाज में नारी जीवन में निहित त्रासद स्थिति: एक अवलोकन
Authors
डॉ. बिउटि दास
Abstract
नारी सृष्टि की जननी, देवी, शक्ति, प्रेरणादायिनी, ममतामयी, त्यागमयी आदि सभी विभूतिओं से अलंकृत होने के बावजूद भी तथाकथित सभ्य समाज द्वारा नारी युगों-युगों से शोषित, प्रताड़ित होती आ रही है । अभी भी नारी अपनी अस्मिता की तलाश करती है । अपनी स्वतंत्र अस्तित्व बनाये रखने के लिए अंत-बाह्य संघर्ष करने के लिए निरंतर बाध्य है । सवा सौ करोड़ भारतीय में जहाँ पचांस प्रतिशत स्त्री आज भी अपनी स्वाधिकार की लड़ाई करते है, खुले आसमान के नीचे चल-फिर की आजादी तो दूर की बात स्वप्ने भी देखना मानो घोर अभिशाप बन गए है । मुक्त रूप से अपनी भावनाओं की अभिव्यक्ति करने में साहस जुटा नहीं पाते है । यौन उत्पीड़न, बाहरी और आंतरिक दबाव के द्वंद्व से एक प्रकार नारी कुंठित मानसिक ग्रंथि का शिकार होने के लिए विवश हो जाती है । जीवन की तमाम विसंगतियों और विविध आयामों में नारी जीवन की त्रासद स्थिति से गुजरती हुई कृष्णा सोबती के उपन्यास “सूरजमुखी अंधेरे के” की स्त्री पात्र रत्ती की मानसिक संवेदनाओं को, आंतरिक उलझनों को, उसकी भीतर की कराह पीड़ा दुख को अनुभूति की गहराई से परखने की सफल अभिव्यक्ति उपन्यासकार ने किया है । हर गली, हर नगर, हर शहर में लाखों हजारों रत्ती आज भी मिलेंगे जिसकी स्थिति आसमान में उड़ते हुये उस पक्षी की भांति है जिसकी अचानक पंख टूट जाने पर असहाय फड़फड़ाती है । रत्ती बचपन में बलात्कार का शिकार हुई थी परंतु रत्ती की विड़म्बना यह है की वह जिंदेगी भर समाज द्वारा बलात्कार होने के लिए विवश हो जाती है, यही उसकी नियति है । रत्ती के माध्यम से आज के समाज मेँ नारी जीवन मेँ निहित त्रासद स्थिति का अवलोकन करना मेरे शोध पत्र का उद्देश्य है ।
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Pages:01-04
How to cite this article:
डॉ. बिउटि दास "“सूरजमुखी अंधेरे के” की नायिका रत्ती और आज के समाज में नारी जीवन में निहित त्रासद स्थिति: एक अवलोकन ". International Journal of Hindi Research, Vol 7, Issue 4, 2021, Pages 01-04
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