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VOL. 7, ISSUE 4 (2021)
समय, समाज और जीवन यथार्थ से निर्मित नागार्जुन, त्रिलोचन और केदारनाथ अग्रवाल की कविताएं
Authors
डाॅ. सरला शर्मा, सुश्री चंद्रलेखा पुरोहित
Abstract
प्रगतिवाद के वृहतत्रयी कहे जाने वाले नागार्जुन, त्रिलोचन व केदार की कविताएं समय, समाज और जीवन यथार्थ से गहनता से जुडी हैं। वे धरती और मिट्टी से उपजे कवि है इसलिए वे जीवन की विसंगतियों के प्रति बहुत ही सजग दिखाई देते हैं। उनके लिए समाज व सामाजिक चेतना महत्वपूर्ण हैं। वे उसी से प्रेरित और पोषित हुए है। और यह सत्य है कि एक कविता की सबसे बडी ताकत जीवन की सच्चाईयों की ईमानदार अभिव्यक्ति में ही निहित होती है क्योंकि अपने समय, समाज और जीवन यथार्थ से संस्कारित कविता ही लोक को आश्वस्त कर सकती हैं।
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Pages:32-34
How to cite this article:
डाॅ. सरला शर्मा, सुश्री चंद्रलेखा पुरोहित "समय, समाज और जीवन यथार्थ से निर्मित नागार्जुन, त्रिलोचन और केदारनाथ अग्रवाल की कविताएं ". International Journal of Hindi Research, Vol 7, Issue 4, 2021, Pages 32-34
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