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VOL. 7, ISSUE 4 (2021)
हिन्दी युवा लेखिकाओं की प्रमुख कहानियों में चित्रित स्त्री जीवन का यथार्थ
Authors
डॉ. तबस्सुम खान, आशा चंदर बारेकर
Abstract
स्त्रियों की स्वतंत्रता का जो शोर निरंतर मच रहा है। साथ ही जिन सांस्कृतिक खतरों का भय दिखलाया जा रहा है। वह सब मात्र कागज तक सीमित है। इन कहानियों में एक ओर स्त्रियों को घुटते-सिसकते एवं उसके संघर्षों का अंकन किया जा रहा है। दूसरी और विवाह संस्था को नकार कर स्त्रियां ऐसी संबंधों में अपनी स्वतंत्रता ढूंढ रही है। सदियों से चली आ रही स्त्री शोषण की मानसिकता पर आज के ऐसे संबंध उसकी स्वतंत्रता एवं उसके बदलते वातावरण का आकलन करती अनेक कहानियां लिखी जा रही है। इसी प्रकार स्त्री की बदलती स्थितियों के बीच आकांक्षा पारे की कहानी ‘‘तीन सहेलियां, तीन प्रेमी, प्रेम, स्वतंत्रता एवं स्त्री पुरूष संबंधों की पड़ताल करती है। कहानी में तीनों सहेलियों यके प्रेमी विवाहित है। उन्हें विवाहेत्तर संबंधों से कोई गुरेज नहीं है। क्योंकि उन्हें उम्र के इस पड़ाव पर कुंवारे लड़के मिलने की संभावना नहीं लगती है। इस संदर्भ में एक सहेली कहती है, ‘‘समझने की कोशिश करो बच्ची, हम जिंदगी मांग रही है। उनकी जिंदगी। सामाजिक जिंदगी, आर्थिक जिंदगी, इज्जत की जिंदगी। वह जिंदगी हमें कोई क्यों देगा। इसलिए नहीं कि, हम काबिल नहीं हैं..... हिस्सा बन सकते हैं न ही हिस्सेदार।’’ देह की आवश्यकता उम्र देखकर नहीं आती है। कहानी में तीनों सहेलियां एकाकीपन की ऊब एवं घुटन से भरी हुई है। यह कहानी संबंधों के अलग-अलग चेहरों के दर्शन कराती है। हमारे समाज में अपनी शर्तों पर जीवन जीने की विचारधारा का परिणाम इस प्रकार के संबंधों के रूप में आ रहा है। हमारे समाज में स्त्री शोषण का एक घृणित अध्याय विधवा महिलाओं के प्रति भी लिखा गया है। शोषण, भेदभाव एवं अनेक समस्याओं का सामना विधवाओं को करना पड़ता है। विधवा महिलायें मारपीट, भावात्मक उपेक्षा, लैंगिक दुव्र्यव्हार, यौन-शोषण, सम्पत्ति के हिस्से से वंचित आदि का शिकार होती है। युवा विधवाओं को अधेड़ विधवाओं की तुलना में अधिक शोषण एवं उत्पीड़न को सहन करना पड़ता है। विधवा स्त्री की विवशता एवं उनके साथ होने वाले शोषण के अनेक चित्र मनीषा कुलश्रेष्ठ ने कहानी ‘‘रंग-रूप-रस-गन्ध’’ में उकेरा है।
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Pages:139-142
How to cite this article:
डॉ. तबस्सुम खान, आशा चंदर बारेकर "हिन्दी युवा लेखिकाओं की प्रमुख कहानियों में चित्रित स्त्री जीवन का यथार्थ ". International Journal of Hindi Research, Vol 7, Issue 4, 2021, Pages 139-142
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