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VOL. 7, ISSUE 6 (2021)
मैथलीशरण गुप्त के काव्य में नारी विषयक चिन्तन
Authors
रवीन्द्र कुमार
Abstract
हिन्दी साहित्य में नारी विषयक समस्याओं का चित्रण अनेक कवियों ने किया है । कुछ कवियों ने नारी पात्रों के माध्यम से अपनी लेखनी द्वारा सामाजिक समस्याओं को उठाने का काम किया है । उन कवियों में एक नाम मैथलीशरण गुप्त का भी लिया जाता है । उनके सम्पूर्ण काव्य में नारी विषयक चिन्तन अपने चरम पर पहुंचा । भारतीय संस्कृति में नारी का महत्वपूर्ण स्थान है । उसके बिना कोई भी कार्य पूर्ण नहीं हो सकता है । गुप्त जी का विचार है कि नारी ही किसी परिवार और समाज की दशा सुधार सकती है । समाज में देखने को भी मिलता है कि जिस समाज में नारियों का शिक्षा का स्तर अच्छा होता है । वो समाज तरक्की के मार्ग पर चल पड़ता है । गुप्त जी ने अपने काव्य के माध्यम से नारी के प्रति श्रृद्धा भाव व सम्मान रखते हुए उनके हृदय से यहीं भाव उजागर हाते है:- ”यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता” आधुनिक समाज में ”यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता ”सिर्फ सूक्ति बनकर रह गई है । इस सूक्ति को सार्थक करने के लिए समाज में नारी को श्रद्धा भाव से सम्मान देना होगा,नारी चेतना को जागृत करना होगा ।
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Pages:6-8
How to cite this article:
रवीन्द्र कुमार "मैथलीशरण गुप्त के काव्य में नारी विषयक चिन्तन ". International Journal of Hindi Research, Vol 7, Issue 6, 2021, Pages 6-8
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